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डॉ. अम्बेडकर की नई योजना
भाग 1
महात्मा गांधी के पक्के निर्णय के बारे में पता चलने के बाद डॉ. अम्बेडकर ने सर तेजबहादुर सप्रू, बॅ. जयकर और पंडित मालवीयजी की अनुमति से नयी योजना तैयार की। इस योजना में मुख्यतः प्राथमिक चुनाव, बाद में संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों में आरक्षित जगहों की तरह चुनाव की योजना थी। ( यह अलग निर्वाचन क्षेत्र को कुछ नरम नाम दिया गया। ) इस योजना में अस्पृश्यों के लिए आगे बताए अनुसार जगहें आरक्षित रखी जाएंगी।
विधिमंडल की जगहें
प्रांत नई जगहें कुल जगहें अवार्ड अनुसार मद्रास ... 30 215 18 मुंबई ... 16 200 10 बंगाल ... 50 250 10 पंजाब ... 10 175 9 संयुक्त प्रांत ... 40 228 12 बिहार, उडिसा ... 20 175 7 मध्य प्रांत ... 20 112 10 आसाम ... 11 108 4
नई योजना के अनुसार अस्पृश्य समाज को कुल 197 जगहें मिलनी हैं। चुनावों को लेकर पहले दस सालों में अस्पृश्यों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र की ओर से अस्पृश्य उम्मीदवारों के प्राथमिक चुनाव होंगे। इन प्राथमिक चुनावों में जो दो उम्मीदवार पहले स्थान पर चुन कर आएंगे, वे ही आम चुनावों में उम्मीदवार बनेंगे। दस सालों के बाद प्राथमिक चुनावों का यह तरीका खत्म कर दिया जाएगा और उसकी जगह संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र और आरक्षित जगहें आदि चुनाव की पद्धतियों के बारे में सोचा जाएगा।
इस योजना को 20 वर्षों तक जारी रखते हुए अस्पृश्यों के मतानुसार आगे किन शर्तों पर और नीतियों के आधार से प्रतिनिधित्व दिया जाए, इस बारे में निर्णय किया जाएगा। उम्र की कसौटी पर खरे उतरने वाले हर अस्पृश्य को अपना मत देने का अधिकार होगा।
प्रांतिक तथा केंद्रीय विधिमंडल के प्रतिनिधियों की संख्या जनसंख्या पर आधारित हो।