56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 357

340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय भाग 2

सभी प्रांतों के अस्पृश्य वर्ग को महापालिका, स्थानीय बोर्ड, पंचायती, स्कूल बोर्ड और अन्य स्थानीय संस्थाओं में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले।

स्थानीय, केंद्रीय तथा वरिष्ठ कचहरियों में जनसंख्या के अनुपात में और शिक्षा की तय योग्यता के अनुसार अस्पृश्य वर्ग के युवकों को नौकरियां मिलें।

बहिष्कृत वर्ग में शिक्षा का योग्य प्रसार हो, इसके लिए हर प्रांत से शिक्षा के लिए जो सरकारी ग्रांट दी जाती है, उसमें से अस्पृश्यों की लोकसंख्या की अनुपात में योग्य हिस्सा दिया जाए।

कनाडा (कॉंस्टीट्यूशन ऑफ कैनडा) उपनिवेश में जिस तरह व्यवस्था की गई है, उसी के अनुसार शिक्षा, नौकरियां, सेहत आदि मसलों के बारे में अस्पृश्य वर्ग के साथ अगर न्याय न बरता जाए तो उन्हें गवर्नर या वायसराय के पास अर्जी देकर अपना न्यायपूर्ण अधिकार पाने का नया संवैधानिक अधिकार दिया जाए।

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इस प्रकार डॉ. अम्बेडकर और डॉ. सोलंकी अपनी उपर्युक्त योजना लेकर बिड़ला हाऊस गए। ‘आपकी दी हुई यह योजना लेकर हम अभी तुरंत पुणे जा रहे हैं और महात्माजी को हम ये योजना दिखाएंगे। महात्माजी को अगर ठीक लगी और अगर उन्होंने आपसे मिलने की इच्छा जताई, तो हम आपको बुला लेंगे’, कह कर वे सब रात की आखिरी ट्रेन पकड़ कर पुणे के लिए रवाना हो गए। महात्मा गांधी और मुंबई से आए प्रतिनिधियों की बुधवार के दिन सुबह सुबह मुलाकात हुई। तब महात्मा जी ने डॉ. अम्बेडकर से आमने-सामने मुलाकात करने की इच्छा व्यक्त की। और उसके अनुसार दोपहर 1.30 बजे बिड़ला हाऊस से दामोदर हॉल में टेलिफोन कर डॉ. अम्बेडकर को बताया गया कि, महात्मा गांधी ने आपको तुरंत पुणे बुलाया है। जवाब में डॉ. अम्बेडकर ने जवाब भेजा कि वे गुरुवार की सुबह पुणे पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही ‘अन्य किसी भी अस्पृश्य नेता से मैं बातचीत नहीं करूंगा, सिर्फ महात्मा गांधी से ही बातचीत करूंगा’, यह भी उन्होंने स्पष्ट किया। इस तरह बुधवार की रात में बारह बजे की गाड़ी से डॉ. अम्बेडकर और डॉ. सोलंकी महात्मा गांधीजी से बातचीत करने के लिए पुणे गए।

डॉ. अम्बेडकर ने हिंदुस्तान के सभी प्रांतीय अस्पृश्य नेताओं को तार भेज कर तुरंत बुला लिया। मद्रास के सुप्रसिद्ध नेता रा. ब. श्रीनिवासन पहले दिन मुंबई आए और उसी समय मद्रास मेल पकड़ कर पुणे रवाना हुए। उनके साथ श्री शिवतरकर भी गए हैं। ख्1,