56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 359

342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गुरुवार दिनांक 22 सितंबर, 1932 के दिन सुबह नौ बजे नेशनल होटल में सर तेजबहादुर सप्रू और बॅ. जयकर डॉ. अम्बेडकर से मिलने आए। उनमें 9 बजे से लेकर 12.30 बजे तक चर्चा हुई। चर्चा में सर्वप्रथम बताया गया कि डॉ. अम्बेडकर ने जो योजना पेश की है उसमें स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र अगर नहीं भी हो तो भी उनकी बनाई प्राथमिक चुनाव की योजना महात्मा गांधी को पूरी तरह मान्य नहीं है। क्योंकि महात्मा गांधी के मत में उससे पृथक निर्वाचन क्षेत्र की बदबू आती है। इसके अलावा स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र को लेकर अगर दोनों पक्षों में सुलह हो जाए, तो प्रधानमंत्री मि. रैम्से मैकडोनल्ड को तार द्वारा संदेश भेज कर स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र की योजना को तुरंत खारिज करने के लिए कहा जाए। अस्पृश्यों की ओर से की जाने वाली मांगों के बारे में आगे कभी सोचा जाएगा, क्योंकि सोचने में वक्त तो लगेगा ही और तब तक अगर महात्माजी का अनशन शुरू रहेगा तो उनकी जान के लिए खतरा पैदा होगा। उस वक्त डॉ. अम्बेडकर ने साफ-साफ कहा कि आपकी सभी मांगों पर शीघ्र विचार होकर उसमें से हमें क्या मिलता है, इस बात का जब तक पता नहीं चलता है, तब तक अस्पृश्यों को मिलनेव ाला स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र का अधिकार छोड़ने के लिए मैं कभी भी तैयार नहीं होऊंगा। प्रत्यक्ष हाथ में जो चीज है, उसे छोड़ कर किसी भागती चीज के पीछे पड़ने के लिए मैं तैयार नहीं हूं। साथ हीए उन्होंने यह भी साफ किया कि महात्मा गांधी जब तक कम से कम प्राथमिक चुनावों की बात न मानें तब तक हम बातचीत के लिए तैयार नहीं होंगे। अपनी सभी मांगों पर शीघ्र विचार किया जाए। इस तरह, पहली बातचीत में सुलह के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। इसके बाद बॅ. सप्रू और बॅ. जयकर यह कहते हुए चले गए कि, आपका जो कहना है, वह हम कमेटी के सदस्यों तक पहुंचाएंगे तथा सबकी अनुमति से अगर तय हुआ कि आपकी और महात्मा जी की मुलाकात हो तो आपको बताएंगे। पहले तय हुआ कि चार बजे महात्मा गांधीजी से मुलाकात होगी, लेकिन येरवडा की जेल से संदेश आया कि कमेटी के सदस्यों के साथ बातचीत करने के कारण महात्मा जी थक गए हैं। आप थोड़ी देर से आएं ताकि उन्हें आराम के लिए कुछ समय मिले। इस संदेश का अनुसरण करते हुए लोग पांच बजे येरवडा जेल पहुंचे। उस वक्त महात्मा गांधी खुले में एक आम के पेड़ के नीचे बिछी खटिया पर लेटे थे। उनके आसपास उनके शिष्यों में से महादेव देसाई, सरोजिनी नायडू, वल्लभभाई पटेल, राजगोपालाचारी, बिड़ला, सर चुनिलाल मेथा आदि लोग बैठे थे। पहले सर तेजबहादुर सप्रू जी ने महात्मा गांधीजी को होटल की घटनाओं का ब्यौरा दिया। डॉ. अम्बेडकर ने करीब डे़ घंटे तक भाषण दिया। उसमें उन्होंने अपनी नई योजना, कम्युनल अवार्ड इन दोनों के गुणदोषों का विश्लेषण किया। इस चर्चा में एक बड़ी ही आश्चर्यजनक बात सामने आई, प्राथमिक चुनावों की बात का गांधीजी विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि वे उसके पक्षधर थे यह उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा। इतना