56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 360

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ही नहीं उन्होंने स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र के प्रस्ताव में जो कुछ अच्छा था वह सब लेने के लिए हमारा अभिनंदन भी किया। केवल कुछ एक जगहों पर लागू करने के बजाय आपको काउंसिल में मिलने वाली सभी जगहों पर इसे लागू करें, ऐसी सिफारिश भी उन्होंने की। उसके बाद पहले दिन की बातचीत पूरी हुई।

प्राथमिक चुनावों के लिए महात्मा गांधी की सहमति मिलने से दोपहर में फैला निराशा का वातावरण सिमटने के आसार पैदा हुए। सुलह की आशा निर्माण हुई।

शुक्रवार की सुबह नौ बजे पुणे के सेठ शिवलाल मोतीलाल के बंगले पर डॉ. अम्बेडकर की बची हुई मांगों पर विचार करना तय हुआ। बातचीत में जिन चार विषयों पर विचार-विमर्श होना था वे थे - 1) प्राथमिक चुनावों के लिए कितने लोगों का पैनेल हो। 2) केंद्रीय विधिमंडल में अस्पृश्यों के कितने प्रतिनिधि हों। 3) प्रांत विधिमंडल के अस्पृश्यों को कितनी जगहें दी जाएं। 4) आरक्षण की सुविधा कितने समय तक रहे और उसे हटाना हो तो उसके लिए कौन सी शर्तें हों। शुक्रवार, 23 सितंबर, 1932

ऊपर बताए गए सवालों पर सोचने-विचारने के लिए पुणे के राजा बहादुर शिवलाल मोतीलाल के बंगले पर शुक्रवार की सुबह 9.30 बजे कमेटी की बैठक बुलाई गई। पहले प्राथमिक चुनाव लड़ने वाले कितने लोगों को आखरी चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाए, इस विषय पर चर्चा हुई। कमेटी के छह-सात हिंदू सदस्यों का आग्रह था कि प्राथमिक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में से छह-सात लोगों को आखरी चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना चाहिए। डॉ. अम्बेडकर तीन से अधिक उम्मीदवारों को यह अधिकार देने के पक्ष में नहीं थे। लंबी बहस के बाद दोनों पक्ष चार जगहों पर राजी हुए और विवाद को खत्म किया गया। उसके बाद - केंद्रीय विधि मंडल में अस्पृश्यों के कितने प्रतिनिधि हों?- इस प्रश्न पर विचार किया गया। पहले जनसंख्या का अनुपात यानी कुल जनसंख्या का अनुपात या सिर्फ हिंदुओं की जनसंख्या का अनुपात इस विषय पर विचार किया गया। उसमें भी हिंदुओं का आग्रह था कि, अस्पृश्यों की जनसंख्या का हिंदुओं की जनसंख्या के साथ मिलान कर उसी अनुपात में उन्हें प्रतिनिधित्व दिया जाए। कुल जनसंख्या के अनुपात में हमें प्रतिनिधित्व मिले यह डॉ. अम्बेडकर का आग्रह था। राजा-मुंजे करार में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की बात मानी गई थी उसके अनुसार अब आपको अपने वचनों का पालन करना होगा; राजा-मुंजे करार में जनसंख्या के अनुपात से अधिक प्रतिनिधि मिलेंगे, इस झूठ के सहारे आपने हमारे कुछ लोगों को संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र के लिए राजी करवा लिया है। यानी, आपने जो वचन दिया था उसके अनुसार अब आपको चलना होगा आदि मुद्दों पर डॉ. अम्बेडकर ने जोर दिया। उससे एक और