4. समाज जीवन में निरपेक्ष कर्तव्य भावना से संघर्ष करना चाहिए - मई 1924 मुंबई - Page 36

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है। हमें आजादी से डर लगता है, ऐसा लगता है कि स्वराज का रूपांतरण पेशवाई में होगा। लेकिन यह किन विचारों को दर्शाता है? क्योंकि पेशवाई स्वराज और आज के स्वराज में काफी फर्क है। पेशवाई में एक बार स्थापित राजवंश राज करता था। वे जनता की राय से शासन नहीं करते थे। भावी स्वराज में सरकार जनता की राय से चलने वाली होगी और उसमें कोई हमेशा के लिए राजा नहीं हो सकता। इस तरह के स्वराज में यदि जनता के हितों की अनदेखी हुई, उनकी सुरक्षा दूसरे किसी भी प्रकार की राजनीति में नहीं होगी, ऐसा पूरे विष्व का अनुभव है और इसी वजह से लोकसम्मत स्वराज ही सर्वोत्तम प्रषासनिक राज व्यवस्था है। मुझे आश्चर्य होता है कि हम लोग ऐसे स्वराज से क्यों डरते हैं। इसके विपरित उसकी प्राप्ति के लिए हम प्रयत्न करें यह बहुत जरूरी है। आपको इस बात पर गौर करना चाहिए कि मेरा स्वराज से तात्पर्य क्या है।

आज हिन्दुस्तान में स्वराज को लेकर जो मतभेद हैं वे मुख्य रूप से इस बात को लेकर हैं कि अंग्रेजों से सŸा धीरे-धीरे ली जाए या एकमुश्त। सारा जोर इसी मुद्दे पर है। इस बात पर कोई विचार नहीं कर रहा हमें प्राप्त सŸा स्वराज किस की राय से चले। सोचिए यदि सŸा एक ही वर्ग के राय से चलती रही तो क्या अंग्रेजी शासन में जो हालत है उससे भी दस गुना ज्यादा बुरी स्थिति नहीं हो जाएगी?

इसलिए सŸा के सवाल जितना शायद उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा राय का है। और जिस तरह हमारे स्वराजवादियों के इस मुद्दे को गौण मानकर उसकी उपेक्षा की है उससे स्पष्ट है कि उन्हें जनता की राय की कितनी परवाह है। लेकिन हमें इस मुद्दे पर जोर देना चाहिए। क्योकि यदि स्वराज आने वाला है तो हमें भी दूसरों के बराबरी के अधिकार मिलने चाहिए। ऐसे अधिकार प्राप्त करने के लिए हमें वोट (मत) देने का राजनीतिक अधिकार हासिल करना चाहिए। मेरा मानना है कि अभी वोट के अधिकार को इतना संकुचित कर दिया गया है कि सारे हिन्दुस्तान में वह केवल दो प्रतिशत लोगों को ही हासिल है। इस तरह हमारा दोहरा लाभ होनेवाला है। एक आज लॉ काउंसिल की तरफ से होने वाली उपेक्षा नहीं होगी। जो लोग हमारे वोट देने के कारण चुनकर आएंगे वे हमारे हितों की उपेक्षा नहीं कर पाएंगे। कारण यह है कि उनकी लगाम हमारे हाथों में होगी। वोट के अधिकार से केवल इतना ही लाभ होगा ऐसा नहीं है। उससे दूसरा महत्वपूर्ण फायदा है वोट के अधिकार से वर्णाश्रम धर्म पर भारी प्रहार होगा। राजनीति में समान आश्रम होने के बाद सामाजिक स्तर पर वर्णाश्रम धर्म का बने रहना संभव नहीं है। राजनीतिक क्षेत्र में एक ब्राह्मण पर यदि भंगी से वोटों की भीख मांगने की नौबत आई तो वर्णाश्रम धर्म कहां रह जाएगा। इस रंक से राजा बनने के राजमार्ग को पहले हमें अपनाना चाहिए। कुछ वर्ष पहले तक ब्रिटेन में भी मजदूरों की हमारे जैसी ही दयनीय स्थिति थी। 1860