56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 365

348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. केंद्रीय विधिमंडल में अस्पृश्यों के प्रतिनिधि आम निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षित जगहों

के लिए पैनेल से चयनित किए जाएं।

  1. केंद्रीय विधिमंडल में ब्रिटिश हिंदुस्तान के अस्पृश्यों को हिंदुओं की जगहों में से

18 प्रतिशत जगहें दी जाएं।

  1. अस्पृश्य उम्मीदवारों के पैनेल के इस तरीके का इस्तेमाल केवल 10 सालों तक

किया जाए। हालांकि उससे पूर्व सभी जातियां मिल कर अगर उस तरीके को

रद्द करना चाहें तो उस पर किसी को आपिŸा नहीं होनी चाहिए। 6. सभी जातियों द्वारा एकमत से खारिज किए जाने तक आरक्षित जगहों के तरीके

पर अमल किया जा सकता है।

  1. प्रांतिक और केंद्रीय विधिमंडल का अस्पृश्यों का मताधिकार लोथिअन कमेटी की

सिफारिशों के अनुकूल हो।

  1. स्थानीय संस्थानों में चयन अथवा सरकारी नौकरी में नियुक्तियों के मामलों में

अस्पृश्यों पर कोई भी नाकारापन का आरोप उनकी अस्पृश्यता के आधार पर

न की जाए तथा उन्हें सही अनुपात में जगहें दी जाएं।

  1. अस्पृश्यों की शिक्षा के लिए प्रांत की सरकार के बजट में उचित प्रावधान रखा

जाए। ख्1,

इस अनुबंध पर 24 सितंबर के दिन 23 नेताओं ने हस्ताक्षर किए और 25 सितंबर के दिन 18 नेताओं ने हस्ताक्षर किए।

पुणे करार पर जिन्होंने हस्ताक्षर किए उनके नाम-

  1. मदन मोहन मालवीय 12. बी. एस. कामत

  2. तेज बहादुर सप्रू 13. जी. के. देवधर

  3. एम. आर. जयकर 14. ए. वी. ठक्कर

  4. बी. आर. आंबेडकर 15. आर. आर. बखाले

  5. श्रीनिवासन 16. पी. जी. सोलंकी

  6. एम. सी. राजा 17. पी. बालू

  7. सी. वी. मेहता 18. गोविंद मालवीय

  8. सी. राजगोपालाचारी 19. देवदास गांधी

  9. राजेंद्र प्रसाद 20. बिस्वास

  10. जी. डी. बिड़ला 21. पी. एन. राजभोज

  11. रामेश्वर दास बिड़ला 22. गवई जी. ए.

  12. शंकरलाल बंकर

  13. जनता :1 अक्तूबर, 1932