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मुंबई में हुई हिंदू परिषद में निम्नलिखित हस्ताक्षर इनमें दिनांक 25 सितम्बर, 1932 को जोडे़ गए -
लल्लूभाई श्यामलदास 10. पी. कोदंडराव
हंसा मेहता 11. एन. वी. गाडगील
के. नटराजन 12. मनु सुभेदार
कामकोटि नटराजन 13. अवंतिकाबाई गोखले
पुरुषोŸामदास ठाकुरदास 14. के. जे. चितलिया
मथरादास वास्सनजी 15. राधाकांत मालवीय
वालचंद हीराचंद 16. ए. आर. भट्ट
एच. एन. कुंझरू 17. कोलम
के. जी. लिमये 18. प्रधान
ब्रिटिश प्रधानमंत्री की मौसी ससेक्स परगने के आर. डिगले गांव में गुजर गईं। उनकी शवयात्रा में शामिल होने के लिए मैकडोनल्ड साहब सितंबर 24 सितम्बर, 1932 तारीख को निकलने वाले थे। लेकिन हिंदुस्तान से आए तारों को देखकर उन्होंने अपना जाना रद्द कर दिया और पुणे अनुबंध पर मंत्रिमंडल के साथ दो दिनों तक विचार-विमर्श करने के पश्चात् मंत्रिमंडल की सहमति तार के जरिए वायसराय आदि को 26 तारीख को भेज दी। 26 सितंबर, 1932 के दिन हिंदुस्तान सरकार के गृह सचिव (होम मेंबर) मि. हेग ने केंद्रीय विधिमंडल में सरकार की अनुबंध के लिए मान्यता की घोषणा की।
सरकार द्वारा अनुबंध को मान्यता दिए जाने वाला खत इन्स्पेक्टर जनरल कर्नल को भेजा। उन्होंने वह गांधीजी और अन्य नेताओं को मंगलवार 27 सितम्बर, 1932 को तीसरे प्रहर के समय करीब सवा चार बजे दिखाया। सबको लगा कि अब गांधीजी अपने व्रत का समापन करें। गांधीजी ने कहा कि इस सरकारी मंजूरी को अस्पृश्यों के नेताओं द्वारा सहमति जताई जानी चाहिए। वे सब नेता उस वक्त मुंबई चले गए थे। उन्हें फिर बुला कर उनकी सभा लेनी होगी और इस काम में एक-दो दिन लगते। इस अनुबंध पर उन्होंने पहले ही हस्ताक्षर किए हैं और अपनी सहमति भी जताई है, इसलिए फिर इस प्रश्न पर सोचने की जरूरत न होने की बात पंडित हृदयनाथ कुंजरू ने गांधीजी से कही, जिसकी श्री राजगोपालाचारीजी ने पुष्टि की। उसके बाद गांधीजी अपना अनशन तोड़ने के लिए तैयार हुए। कर्नल डॉयल ने कहा, कस्तुरबा गांधी के हाथ से फलों का रस पीकर अनशन खत्म कीजिए। गांधीजी मान गए। गांधीजी के चारों तरफ पानी का छिड़काव किया