56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 367

350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गया। रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी गीतांजली से एक भक्ति गीत गाया। कुछ लोगों ने भगवद्गीता के श्लोक गाए। वहां इकट्ठा हुए करीब 200 लोगों ने गांधीजी का पसंदीदा और नरसी मेहता का लिखा, ‘वैष्णव जन तो तेणे कहिए’, भजन गाया। कस्तुरबा ने गांधीजी को संतरे के रस का गिलास दिया। उन्होंने रस ग्रहण कर अपना अनशन तोड़ा। ख्1,

  1. डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्र : चां. भ. खैरमोडे, खंड 5, पृ. 56, 57 69