57. पूना (पुणे) समझौता बंधनकारी मान कर स्पृश्य बंधु कार्य करे - सितंबर 1932 पुणे - Page 370

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समाज को बहुत अधिक आनंद होगा। महात्मा गांधी के अलावा इस समझौते का श्रेय सर तेजबहादुर सप्रू, पंडित मालवीय और सी. राजगोपालाचारी को देना भी मुझे उचित लगता है।“

डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बाद रा. ब. राजा और मि. के. नटराजन के भाषण हुए। आखिर में सी. राजगोपालाचारी ने आभार व्यक्त किया। आगे किए जाने वाले विधायक कार्यों की कमेटी के गठन के सारे अधिकार अध्यक्ष को हों इस सेठ मथुरादास वसनजी की सूचना को सभा की मंजूरी मिलने के बाद परिषद बर्खास्त हुई।