58. मंदिर जाने से आपका उद्धार नहीं होगा - सितंबर 1932 वरली (मुंबई ) - Page 374

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पर ध्यान रख कर मिले हुए हर राजनीतिक मौके का सही-सही उपयोग करेगा तो अपने समाज के दुख जरूर दूर होंगे। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन नेताओं को आप चुन कर ले आएंगे, उन पर पूरा विश्वास करेंगे, तो वे आपके सच्चे मार्गदर्शक बनेंगे। जिनका हित आपके हित से अलग नहीं होगा और जो स्वार्थी नहीं हैं, ऐसे ही लोगों को आप अपना नेता चुनें। अन्य पार्टियों की अंजुलि से पानी पीने वाले या उनके काम करनेवाले लोग आपमें बस फूट ही डालेंगे। आपको गुमराह करेंगे। वे आपको दगा ही देंगे। ऐसे ढोंगी नेताओं से आप बचके रहिए। आगे हमें बहुत काम करने हैं। आज हमारे पास कोई स्थाई संस्थाएं नहीं हैं। सभी आंदोलनों का केंद्र स्थान बनने लायक जगह नहीं, और काम करने वाले लोगों की भी कमी है। इन दिक्कतों पर मात करने के लिए 2 लाख रुपयों का फंड जोड़ने का संकल्प मैंने किया है। हर वयस्क स्त्री पुरुष को इसमें इजाफा करना होगा। मुझे यकीन है कि ठान लेने पर आप केवल मुंबई में इतनी रकम जुटा सकेंगे। साथ ही, जनता पत्र की बिक्री आपको बढ़ाने की कोशिश करनी होगी। यह हमारा मुखपत्र है। इसी पत्र के द्वारा जनता में हम जान फूंकने वाले हैं। इसीलिए इस पत्र को स्वावलंबी बनाना आपका कर्त्तव्य है।“

इस तरह बाबासाहेब ने करीब घंटे भर तक भाषण दिया। वहां इकठ्ठा हुए लोग उनके भाषण का हर शब्द रत्नों की तरह संजो रहे थे। बाद में अध्यक्ष, बाबासाहेब तथा अन्य लोगों के प्रति आभार प्रकट किया गया। करीब बारह बजे सभा बर्खास्त हुई।