59. भोलीभाली कल्पनाओं के कारण मृत्युलोक का जीवन कष्टकारक हुआ है - अक्तूबर 1932 मुंबई - Page 375

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भोलीभाली कल्पनाओं के कारण मृत्युलोक का जीवन कष्टकारक हुआ

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बेलासीस रोड इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पास के मैदान पर शनिवार दिनांक 8 अक्तूबर, 1932 को रात के 10ः30 बजे पुरुष और महिलाओं की भीड़ इकट्ठा हुई थी। उस सभा का अध्यक्ष स्थान श्री बापूसाहेब सहस्त्रबुद्धे ने स्वीकारा था जो सोशल सर्विस लीग के एक प्रमुख कार्यकर्ता थे। अध्यक्ष पद का सम्मान दिए जाने के लिए आयोजकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि, विद्वŸा, मनोधैर्य और वीरता के कारण पूरी दुनिया डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की कायल हुई है। उनके भाषण समारोह में अपने जैसे सामान्य समाजसेवी व्यक्ति को अध्यक्षपद मिलना यह एक तरह से संकट में पड़ना ही है। लेकिन पत्थर को भगवान बनाने की आदत हिंदुओं को है ही। आप इसके अपवाद केसे हो सकते! उस वक्त कहने योग्य कुछ और बातें कहने के पश्चात् उन्होंने सभा के कामकाज की शुरुआत की। इस सभा का प्रमुख काम था पुणे के सुलहनामे को अनुमोदन करना। श्री सी. ना. शिवतरकर से सुलहनामा पेश करने के लिए कहा गया। इस सुलहनामे पर हस्ताक्षर करने वालों में से श्री शिवतरकर भी एक हैं। डॉ. अम्बेडकर और हिंदू नेताओं में जब बातचीत चल रही थी, तब वे भी वहां उपस्थित थे। इसलिए सुलहनामे पर उनका भाषण बहुत अच्छा रहा। श्री चव्हाण तथा अन्य वक्ताओं से इस प्रस्ताव के लिए अनुमोदन पाने के बाद तालियों की गड़गड़ाहट में प्रस्ताव मंजूर किया गया।

दूसरा प्रस्ताव रा. ब. बोले के बिल की मंजूरी के लिए था। श्री वनमाली ने उसे प्रस्तुत किया। मुंबई की म्युनिसिपल कार्पोरेशन स्कूल कमेटी में अस्पृश्यों के खास प्रतिनिधि का होना किस तरह आवश्यक है, यह उन्होंने अच्छी तरह स्पष्ट किया। सही अनुमोदन मिलने के बाद इस प्रस्ताव को भी मंजूर किया गया। उसके बाद अध्यक्ष ने डॉ. अम्बेडकर से भाषण करने का अनुरोध किया। उनका भाषण सुनने के लिए श्रोता पहले से ही बहुत उत्सुक थे। उपरोक्त दो प्रस्ताव रखने और उन्हें मंजूर करने में काफी समय बीत गया था, इसलिए श्रोताओं की उत्सुकता अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। उनके भाषण में नाटकीयता नहीं थी, लेकिन हर शब्द चिŸाकर्षक और विचारों को बढ़ावा देने वाला था। उनके भाषण में कोई कठिन शब्द इस्तेमाल नहीं किया गया था। विचारों को इतने सीधे-सादे शब्दों में पिरोया गया था कि अनपढ़ हो या बच्चा हो, हर कोई आसानी से समझ ले। इसके बावजूद हर

* जनता : शनिवार 15 अक्तूबर, 1932

तारीख 9 अक्तूबर, 1932 की भी हो सकती है