59. भोलीभाली कल्पनाओं के कारण मृत्युलोक का जीवन कष्टकारक हुआ है - अक्तूबर 1932 मुंबई - Page 378

361

तक के लिए महारों की खेती की जमीनें छीन ली गईं। इसमें महारों का हजारों रुपयों का नुकसान हुआ। ऐसी शिकायतें सुनने में आते ही कोई वकील वहां भेजा जाना चाहिए। वहां पूछताछ की जानी चाहिए लेकिन रुपयों की कमी के कारण यह करना कठिन होता है। इस काम के लिए फंड इकट्ठा कर व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं। हां, इन सरकारी अधिकारियों को साफ-साफ बताना चाहता हूं कि अगर ऐसा ही सब अन्याय चलता रहा तो उसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे।“

इस प्रकार उनके भाषण के बाद सभा में आए मे. मणियार साहब से दो शब्द कहने की विनति की। मे. मणियार साहब ने पुणे के सुलहनामे के प्रति अपनी खुशी जाहिर की और डॉ. अम्बेडकर के काम की बहुत प्रशंसा की। आखिर अध्यक्ष के प्रति आभार प्रकट करने के बाद सभा समाप्त हुई।