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शुक्रवार दिनांक 4 नवंबर, 1932 की रात को 9 बजे बालपाखाडी में गुजराती मेघवाल और अन्य सभी अस्पृश्यों की बहुत बडी आम सभा बुलाई गई थी। उस सभा में मंच पर सब दूर गांधी-अम्बेडकर अनुबंध अजरामर रहे, डॉ. अम्बेडकर ही हम अस्पृश्यों के सच्चे नेता हैं, अस्पृश्यों का उद्धार करने के लिए भगवान डॉ. अम्बेडकर को लंबी आयु दे, जैसी घोषणाएं लगाई गई थीं। ठीक नौ बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, डॉ. सोलंकी, शिवतरकर, गोविंद चव्हाण, सुभेदार सवादकर, फणसे, चित्रे बंधू और अन्य नेताओं के साथ आकर सभास्थल में विराजमान हुए। उनके आते ही डॉ. अम्बेडकर जिंदाबाद की ध्वनि गूंजने लगी। करीब पांच मिनटों तक लगातार उनके नाम का जयकार हुआ। उसके बाद श्री भाणजी राठोड़ ने डॉ. सोलंकी साहब को अध्यक्षस्थान स्वीकारने का प्रस्ताव रखा। उसे शिवराम चौहान का समर्थन मिलने के बाद तालियों की गूंज में डॉ. सोलंकी साहब ने अध्यक्षस्थान ग्रहण किया। उसके बाद लक्ष्मण डी. सोलंकी, डिप्रेस्ड क्लास वेल्फेयर कमिटी के प्रमुख ने मानपत्र पढ़ कर सुनाया। फिर चांदी की डाली में वह अध्यक्ष के हाथों डॉ. अम्बेडकर को अर्पण किया गया। मानपत्र के जवाब में डॉ. अम्बेडकर ने कहा,
”भाइयों और बहनों!
आपने मुझे जो मानपत्र दिया है उसका महत्व मुझे अन्य जगहों से मिले मानपत्रों से अधिक है। इसके लिए मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। इस चाली में रहने वाले आप लोग म्युनिसीपालिटी में काम करते हैं। खादी भक्त काँग्रेस के अभिमानियों ने कई बार यहां आकर आपको उपदेश दिया है कि, कांग्रेस ही आपका भला करेगी, इसलिए कांग्रेस की मदद कीजिए वगैरा। लेकिन वही खादीभक्त म्युनिसिपल कार्पोरेशन में हैं। वहां उन्होंने आपके लिए क्या किया है, इस पर विचार कीजिए। जब जब यह प्रस्ताव सामने आया कि पांच रुपए भरने वाले को वोट देने का अधिकार होना चाहिए, तब-तब खुद को गरीबों के मसीहा कहलाने वाले लेकिन हमेशा अमीरों हितों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगाने वाले, इन खादीभक्त काँग्रेसवादियों ने उसका विरोध किया, उसे नामंजूर किया। आपकी खोलियों की, मकान की मरम्मत की या आपको मिलनेवाली कम तनख्वाह बढ़ाने की इन लोगों ने कभी कोशिश नहीं की। आपने अगर चार दिन काम बंद रखा तो पूरे शहर में गंदगी इक्ट्ठा होगी और बीमारियां फैलेंगी। लेकिन ऐसे परोपकार वाले काम की कीमत क्या मिलती
‘जनता’ : 12 नवम्बर, 1932