370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए तैयार नहीं हैं। उसके साथ एक और बात जुड़ी है, जिन लोगों के साये से भी वे लोग बचकर रहना चाहते हैं, उनके साथ अब उन्हें समानता से रहना और उनकी हुकूमत को मान कर चलना पड़ेगा। अपनी उन्नति की अभी-अभी शुरुआत हुई है। अभी-अभी हमारे हालात सुधरने लगे हैं। पहले अपने लोग पुलिस में नहीं हुआ करते थे, लेकिन आज अस्पृश्य लोग पुलिस में नौकरी कर रहे हैं। मैट्रिक करने वाले अस्पृश्यों के बच्चे पुलिस का प्रशिक्षण पा रहे हैं, उनके मातहत अन्य स्पृश्य लोग नौकरी करेंगे। इसके लिए हममें ज्यादा से ज्यादा अधिकारी वर्ग के तैयार होने की जरूरत है। पूरे समाज के दर्जे में सुधार आना चाहिए। तभी हम पर कहीं अन्याय नहीं किया जाएगा। आज हममें से कोई डिप्टी कलक्टर, तहसीलदार तो कोई पुलिस इन्स्पेक्टर हुआ दिखाई देता है, लेकिन ऐसे उदाहरण बहुत कम हैं। आगे इस संख्या में बढ़ोतरी आनी है। इस तरह से जब अपने लोग अधिकारी बनेंगे तब ऊपरी वर्ग के लोगों के हम पर हो रहे अत्याचार कम होंगे। लेकिन यह सब प्राप्त करने के लिए आप लोगों को हमेशा जागृत रहना चाहिए। एक कहावत है ”हीरा पड़ा राह में कोई अंधा निकल जाए।“ यानी कि अंधे को हीरे की क्या कीमत? इसलिए कहता हूं यह जो मौका मिला है उसे व्यर्थ न गंवाएं। इस देश की राजनीति में इससे पूर्व कभी न घटित हुई बातें अब घटने लगी हैं। अब तक यही चलता रहा था, ”नीचे वाला बस पीसता रहे और ऊपर वाला रोटी खाता जाए।“ ऊपरवालों के मजे हैं और नीचे वालों की जान आफत में है। अंग्रेजों का राज आया, लेकिन वे क्रांति नहीं लाए। हमारी स्थिति में बदलाव लाने की कोशिश उन्होंने नहीं की। वे पराए लोग थे। उन्हें अपने यहां राज चलाने के लिए उच्चवर्णियों की मदद लेनी पड़ती थी। इसीलिए उनकी अनुमति लेकर ही वे राज्य चलाते थे। इसीलिए हमारी प्रगति नहीं हो पाई। किंतु अब के बाद ऐसा नहीं होगा। नए संविधन के अनुसार हम भी सŸा में आएंगे। ऊपर वाला और नीचे वाला ऐसा भेद नहीं रहेगा।
हम कानून बनाएंगे। विधिमंडल में हमें अलग प्रतिनिधित्व मिला है। हमारे प्रतिनिधि विधिमंडल में बैठेंगे और फिर उनकी सलाह के अनुसार पूरे देश का प्रशासन चलेगा। गांव में महार को कोतवाली में आने नहीं दिया जाता था। लेकिन वही महार जब लेजिस्लेटिव कौंसिल में जाएगा तब गांव के लोगों को अस्पृश्य लोगों के साथ समानता का बर्ताव करना ही पड़ेगा। लेकिन मुझे इस बात की पूरी तसल्ली नहीं है कि मिली हुई इस शक्ति का आप पूरा-पूरा उपयोग करेंगे। अपने हाथ कौन-सी शक्ति आ रही है, इस बारे में पूरी तरह जागरुक रहें और इस शक्ति के बारे में सोचें। आपसी भेद को बढ़ावा मिले ऐसा कुछ मत करिए, एकता को बढाएं। फूट को मिटा दें। दुर्भाग्य की बात यह है कि आपस में फूट का नशा बढ़ता जा रहा है। सब दूर झगडे हो रहे हैं। इससे सब किए पर पानी फिर रहा है। नासिक जिला और कोंकण