64. भाग्य पर भरोसा करके ना बैठिए, जो करना हो वह अपनी भुजाओं के बल पर करिए - फरवरी 1933 कसारा (ठाणे) - Page 389

372 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पहचान कर उसके हिसाब से अपना बर्ताव रखें। जो कुछ बुरा होता है, वह ईश्वर करता है; ईश्वर ने ही हमें अस्पृश्यों को जन्म दिया है; यह भगवान की ही इच्छा है जैसे खयाल दिल से निकाल दीजिए। फिलहाल आप ईश्वर के बारे में सोचें ही नहीं। पिछले जनम में किए किसी पाप के कारण नहीं, हमारी हालत आज ऐसी है, क्योंकि लोगों ने अपने स्वार्थ पूरे कर लिए, और हमारा नुकसान किया। पिछले जन्म के पापों के कारण यह नहीं हुआ है। महार के पास अगर जमीन नहीं है, तो वह इसलिए कि अन्य लोगों ने वह हड़प ली है। अन्य लोगों ने लूट लीं इसीलिए अस्पृश्यों के पास आज नौकरियां नहीं हैं। यह जो कुछ अच्छा-बुरा हो रहा है उसे सुधारना अपने ही हाथ में है। रेलवे का उदाहरण लेते हैं। रेल का कामकाज वाइसराय की विधि परिषद से चलता है। रेलवे से कामगारों की छंटनी करनी हो तो सबसे पहले अस्पृश्य वर्ग के कामगारों को हटाया जाता है। अन्य वर्ग के कामगारों पर संकट की यह गाज तुरंत नहीं गिरती। क्योंकि अन्य वर्गों के कामगारों की जाति के, धर्म के प्रतिनिधि विधि परिषद में मौजूद होते हैं। वे अपने कामगारों के हित में वहां डटे रहते हैं। अपने वर्ग के प्रतिनिधि वहां नहीं हैं। हमारा एक प्रतिनिधि वहां है, लेकिन वह बेचारा अपने वर्ग के बारे में वहां कुछ बोलता ही नहीं। लेकिन अब हालात बदलेंगे। अबके बाद वायसराय की विधि परिषद में 18 प्रतिशत प्रतिनिधि हमारे वर्ग से चुने जाएंगे। इसीलिए, हमें सावधान रहना होगा और केवल उन्हीं लोगों को चुन कर भेजना होगा जो ठीक ढंग से काम करने वाले हैं। आपको एक आखिरी बात बताता हूं, भाग्य पर भरोसा मत रखिए। जो भी करना हो वह अपने बाजुओं के बल पर करो। इतनी देर तक आपने मेरा भाषण शांतिपूर्ण ढंग से सुना, सभा का यह कार्यक्रम आयोजित किया इसके लिए मैं आप सबके प्रति आभार व्यक्त करते हुए मैं अपना वक्तव्य पूरा करता हूं।