65. कोकणस्थ, देशस्थ का भेद मुझे मंजूर नहीं - फरवरी 1933 मुंबई - Page 390

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रविवार दिनांक 19 फरवरी, 1933 के दिन दांडारोड वांद्रे, मुंबई में श्री देवराव नाईक की अध्यक्षता में अस्पृश्यों की एक सार्वजनिक सभा हुई। इस सभा का उद्देश्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर.का स्वागत कर उनका सम्मान करना था। सभा में उनके कार्य को सबकी मान्यता जाहिर करने के लिए उन्हें चांदी का गुलदस्ता अर्पण किया गया। सभा में वांद्रे में रहने वाले स्त्री-पुरुष सम्मिलित थे। डॉ. अम्बेडकर ने इस सभा में जो भाषण दिया वह दिल को छूने वाला विचार प्रेरक था। सो, युवाओं के जरिए इधर जो लोग समाजकार्य में बाधा डाल रहे थे, उनका जिक्र होना स्वाभाविक था। उन्होंने अपने भाषण में कहा,

”कुछ लोग ठाणे के बोर्डिंग के बारे में और समता सैनिक दल के बारे में अफवाहें फैला कर समाज में फूट डालने का बुरा काम कर रहे हैं। ये लोग और कोई नहीं बल्कि हमारे ही समाजबांधव हैं। वे बुजुर्ग लोग हैं और इसीलिए हम-तुम अब तक उनका सम्मान करते आए हैं। लेकिन आज उन्होंने अपना अनुभव और अपनी अकल गिरवी रख छोड़ी है। राजमान्य संभाजी गायकवाड़, रा. गोविंद रामजी आड्रेकर और रा. शिवराम गोपाल जाधव ने इन विभाजनकारी लोगों का नेतृत्व स्वीकार किया है। इनकी बुद्धि बढ़ती उम्र के साथ बढ़ने की जगह घटती जा रही है। अचरज की बात यह भी है कि कुछ युवक उनकी बातों में आकर अपनी शक्ति, समय और वक्तृत्व का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इन युवाओं से मुझे उम्मीद है कि वे अपनी ताकत का इस्तेमाल समाज में एकता स्थापित करने के लिए करेंगे। इन लोगों का आज का काम सिर्फ इतना है कि मेरी गैर-हाजिरी का फायदा लेकर सार्वजनिक काम को खत्म करना।

उनकी जो आपिŸायां अब तक मुझ तक पहुंची हैं, वे इस प्रकार हैं -

  1. ठाणे के बोर्डिंग में कोकणस्थ छात्रों को प्रवेश नहीं मिलता।

  2. इस बोर्डिंग के सुपरिंटेंडेंट के पद पर शिवराम गोपाल जाधव की नियुक्ति

की जाए।

  1. सुभेदार सवादकर को समता सैनिक दल के सर्वाधिकारी के पद पर क्यों

चुना गया?

  1. हमारे आंदोलन में अन्य जातियों का प्रवेश क्यों हो?

* जनता : 25 फरवरी, 1933