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लोगों की धर्म भीरूता का फायदा उठाने वालों से चौकस रहें
शनिवार तारीख 4 मार्च, 1933 को रात 9.30 बजे मुंबई के सैंडहर्स्ट रोड (वाडीबंदर) के पास जी.आई.पी. रेलवे खुले मैदान चाल के पास वाली इण्डियन पेनुनसुला रेलवे पर एक शामियाना लगाया गया था। वहां श्री ग्रेट आर. डी. कवली, बी. ए., एल. एल. बी. की अध्यक्षता में अस्पृश्य वर्ग की सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में अखिल भारतीय अस्पृश्य वर्ग के नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र अर्पण किया गया। इस अवसर पर कई महिलाएं और पुरुष एकत्रित हुए थे। श्री शिवतरकर, श्री नाईक, सहस्त्रबुद्धे, दिवाकर पगारे, शा. उपशाम, कमलाकांत चित्रे, मेषराम आदि लोग भी सभा में उपस्थित थे।
पहले रा. पुंजाजी जाधव ने अध्यक्ष की सूचना का प्रस्ताव रखा जिसका अनुमोदन रा. करडक ने किया। अध्यक्ष के स्थान ग्रहण करने के बाद रा. दिवाकर पगारे ने मानपत्र पढ़ कर सुनाया। उस मराठी भाषा के मानपत्र पर डॉ. अम्बेडकर के लिए दीर्घायु की कामना करने वाले 85 लोगों के नाम थे। मानपत्र इस तरह था -
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जातिभेदविध्वंसक, समाजक्रांतिकारक, हितमार्गदर्शक, मूकनायक
डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर
एम. ए., पी-एच डी., डी. एस. सी., बार अॅट लॉ
एम. एल. सी. जे. पी., मुंबई
परमप्रिय डॉ. बाबासाहेब! आपके चरणों में, मूल रूप से नासिक जिले के निवासी अस्पृश्य माने जाने वाले, मुंबई के सैंडहर्स्ट रोड (वाडीबंदर) के पास जी.आई.पी रेलवे चाल में रहने वाले आपके सभी आज्ञाकारी और विनम्र अनुयायियों का सप्रेम जोहार सादर है!
आपका हर क्षण बहुत अमूल्य है, इसके बावजूद हम गरीबों की उत्कट इच्छा के अनुसार आपने आज यहां आने की कृपा की, हमने बड़ी धन्यता महसूस की। हम आपके बडे़ आभारी हैं।
आप बड़े गुणवान हैं, साथ ही बड़े धैर्यशाली हैं। आपकी असीम बुद्धिमŸा की तथा आपकी वीरता को कसौटी पर कसने वाले तथा उसका परिचय देने वाले कई छोटी-बड़ी घटनाएं अब तक के आपके जीवन में आ चुकी हैं। आपकी यशोदायी
* जनता : 11 मार्च, 1933