66. लोगों की धर्म भीरूता का फायदा उठाने वालों से चौकस रहें - मार्च, 1933 मुंबई - Page 393

376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

छात्रदशा, महाड़ और नासिक सत्याग्रह के समय का आपका स्फूर्तिदायक नेतृत्व, समाज के हित के लिए गोलमेज सम्मेलन में आपका किया हुआ काम, पुणे समझौते के समय प्रकट हुआ आपका प्रबल आत्मविश्वास, आपकी असीम बुद्धिमŸा और प्रचंड वीरवृŸा का परिचाय देने वाले आपके जीवन के कुछेक प्रसंगों में से एक है। सफल छात्र, चतुर राजनीतिज्ञ और धैर्यशाली नेता के रूप में आपकी जो कीर्ति है वह इन प्रसंगों से अजरामर होकर आसमान तक फैली है। जैसे-जैसे समय बीतेगा वैसे-वैसे आपका कीर्तिदीपक अधिकाधिक प्रज्ज्वलित होता रहेगा, यह निश्चित है।

महाराज, आपने हमारा मार्ग प्रकाशित किया है। हमारे हृदय में नई चेतना की दिव्य ज्योति जगाई है। युगों-युगों के अज्ञान एवं अंधकार को भेद कर प्रकाश देने वाली और पहले कभी किसी से हमें न मिली नयी ज्ञानदृष्टि आपने हमें दी है। केवल दुनिया की नजर में ही नहीं वरन् खुद हमारी नजरों में भी हमारी कीमत आपने बढ़ाई है, हममें आपने स्वाभिमान जगाया है। आत्मसम्मान के महत्त्व को आपने हमें समझाया है।

आप हमारे अनन्य नेता हैं, हमारे सही मार्गदर्शक हैं, हमारे सन्मित्र हैं, हमारा सब कुछ आप हैं। हमारे भगवान, हमारा धर्म, हमारी राजनीति और हमारा समाजकारण आपके शब्दों में और आपकी नीति में समाया हुआ है।

सम्माननीय महाराज, हम गरीब हैं, लेकिन हमारा आपके प्रति प्रेम, आपके प्रति हमारी निष्ठा और हमारा आप पर विश्वास समर्थ और अटल हैं। उनके बल पर आप जिस मार्ग पर कहेंगे, उस मार्ग पर, फिर वह भले कितना ही कठिन क्यों न हो, चलने की हम हृदयपूर्वक और दृढ़ संकल्प होकर कोशिश करेंगे, इस तरह का आश्वासन आपको देने की इजाजत हम खुद ले रहे हैं। हमारी निष्ठा का, कृतज्ञता का और हम सबकी तरफ से आपको खुले आम दिए आज के आश्वासन के और आज के इस अविस्मरणीय दिन के एक छोटे से स्मारक के रूप में तथा एक छोटे से सबूत के रूप में, फूल नहीं फूल की पंखुड़ी के रूप में सही हम यह मानपत्र आपके चरणों में सादर अर्पण कर रहे हैं। कृपया इसको स्वीकार कर हमें कृतार्थ करें। ख्1,

उसके बाद अध्यक्ष के हाथों डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र अर्पण किया गया। साथ ही चांदी की एक कप-प्लेट और माला और गुलदस्ता देकर डॉ. बाबासाहेब का सम्मान किया गया। इसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भाषण देने के लिए उठ खडे़ हुए। पहले उन्होंने अपना सम्मान किए जाने का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा,

  1. डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को समर्पित मानपत्र : संपादक शंकरराव हातोले. पृष्ठ 12-13