66. लोगों की धर्म भीरूता का फायदा उठाने वालों से चौकस रहें - मार्च, 1933 मुंबई - Page 397

380 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्या है? इस सवाल का जवाब एकदम सीधा/सरल है। अब बहिष्कार करने वालों को लगने लगा है कि अगर उन्होंने अपना बहिष्कार जारी रखा तो सŸा जब आएगी तब अन्य समाज के लोग उस पर काबू कर लेंगे। इसीलिए, अनचाहे सुधार भी स्वीकारने के लिए वे तैयार हो गए हैं। कहने का मतलब यही कि जो लोग बहिष्कार कर रहे थे, वे भी अपना हित साधने के लिए तैयार हैं।

इसके बाद हिंदुस्तान में जो लड़ाई जारी रहेगी वह अंग्रेजों और हिंदुस्तानियों के बीच न चल कर हिंदुस्तान के अगडे़ और पिछडे़ लोगों के बीच होने वाली है। आप शायद कहें कि पिछड़ा वर्ग बहुसंख्या में है इसलिए उन्हें अगड़ों से डरना नहीं चाहिए। लेकिन आपको एक बात ध्यान में रखनी होगी कि कोई समाज बहुसंख्यक है, केवल इसी से बात नहीं बनने वाली। उस समाज के लोगों का शिक्षित, जागरुक और स्वाभिमानी होना भी जरूरी होता है, तभी उस समाज की ताकत बढे़गी। वरना किसी मिल मालिक या किसी अमीर साहूकार द्वारा आपको घूस दी और उसके एवज में आप लोगों ने उन्हें अपने वोट बेच दिए तो आपके समाज की विशिष्टता नष्ट ही होगी। किराए पर लाए गए लोग, आपके समाज का कल्याण बिल्कुल नहीं कर सकते। हमेशा एक बात अपने मन में जाग्रत रखें कि हमारे समाज की भी कोई विशेषता रही है। साथ ही आपसी मतभेद भुला कर हमें अपनी संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाना होगा। हालात का ज्ञान रखना होगा। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को चाहिए कि वह हर रोज ‘जनता’ अखबार खरीदे। ‘जनता’ समाचार-पत्र का ग्राहक बनें। इससे आपका परिस्थितियों के बारे में ज्ञान बढे़गा। खुद का फायदा किस चीज में है, यह जानने के लिए हालात का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। आखिर में वालिंटियर समता सैनिक दल के बारे में मुझे कुछ सूचनाएं देनी हैं। ज्ञानवान और जानकार आदमी ही वालंटियर बन सकता है, यह हमारा विश्वास है। केवल

खाकी रंग के कपडे़ पहन कर कोई वालंटियर नहीं बनता। अपने समाज को ज्ञानवान बनाना वालंटियरों का प्रमुख कर्तव्य है। अनपढ़ लोगों को ‘जनता’ अखबार पढ़ कर सुनाना, उसका मतलब समझाना यह उनका काम है। मुझे आशा है कि वे अपना कर्त्तव्य निभाएंगे। आप सब लोगों के प्रति फिर से धन्यवाद व्यक्त कर मैं अपना भाषण पूरा करता हूं।“