67. छात्रावस्था में ही अपनी योग्यता बढ़ाएं - अप्रैल, 1933 ठाणे - Page 398

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रविवार दिनांक 2 अप्रैल, 1933 के दिन सुबह 10 बजे मुंबई से दलित नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, बार एट-लॉ आए। ठाणे के अखिल भारतीय बहिष्कृत शिक्षण प्रसारक मंडल के मुंबई-ठाणे रोड पर स्थित नामदार आगा खान के विस्तीर्ण बंगले के परिसर में बने दलित विद्यार्थी छात्रावास की जांच हेतु उन्हें आमंत्रित किया गया था। उन्हें छात्रावास में ले आने के लिए बोर्डिंग के सुपरिटेंडेंट श्रीयुत चांदोरकर और ठाणे सामाजिक समता सेवा संघ के श्रीयुत मारुतीराव साबाजी गायकवाड़ उन्हें लिवाने के लिए आगे रेलवे स्टेशन पर गए थे।

डॉ. बाबासाहेब के महासचिव श्रीयुत शिवतरकर और डॉ. बाबासाहेब के मुंबई के सहकारी कार्यकर्ता बापूसाहब सहस्त्रबुद्धे, कमलाकांत चित्रे, जाधव, गायकवाड, मडके बुवा आदि नेता भी साथ आए हुए थे। डॉ. बाबासाहेब के आने से काफी समय पहले ठाणे शहर के अस्पृश्योद्धारक स्पृश्य सज्जन नागरिक वहां उपस्थित हुए थे। उनमें से एम. एस. रांगणेकर साहब, एल. रॉड्रिक्स साहब, आर. एल. रेडेसाहब, नाखवा, गटनेसाहब, केसकर साहब, कोतवाल साहब, माधवराव कालदाते, पùनाभशास्त्री पालवे आदि हितचिंतक वहां दिखाई दे रहे थे। उस दिन स्थानीय कारखाने, मिलें आदि खुली होने के बावजूद बाबासाहेब के आने की खबर सुन कर जगह-जगह से आए दलित समाज के सभी छोटे-बडे़ महिला-पुरुषों का समुदाय वहां इकट्ठा हुआ था।

डा.ॅ बाबासाहेब मोटर से उतर कर इमारत की सीढि़यों पर आते ही उनके नाम की जयकार होने लगी। सामाजिक समता सेवा संघ, छात्रावास में रहने वाले छात्रवृंद, और अखिल भारतीय दलित सेवक संघ (ठाणे शाखा) के अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं की ओर से उनका स्वागत किए जाने के बाद, श्री एम. एस. रांगणेकर द्वारा डॉ. बाबासाहेब को उनके लिए बनाई गई जगह पर बिठाने के बाद श्रीयुत गणपत गोविंद रोकडे़ ने वहां इकठ्ठा हुए जन समुदाय की ओर से उनसे विनति की कि वे इस मिश्र सम्मेलन के अध्यक्ष का स्थान ग्रहण करें और छात्रों को उपदेश के दो शब्द सुनाएं। श्रीयुत मारुतीराव साबाजी गायकवाड़ द्वारा उनके प्रस्ताव का अनुमोदन किए जाने के बाद अपने सामने मेज पर रखी सभा के कार्यक्रमों की सूची पर नजर दौड़ा कर वह जब भाषण देने के लिए उठ खडे हुए तब तालियों की बौछार हुई। उन्होंने कहा,

* जनता : 22 अप्रैल, 1933