67. छात्रावस्था में ही अपनी योग्यता बढ़ाएं - अप्रैल, 1933 ठाणे - Page 399

382 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

”पहले यह छात्रावास आश्रम हमने पनवेल में स्थापित किया गया था। वहां स्पृश्य समाज के किसी ने भी छात्रावास के लिए जगह नहीं दी थी इसलिए एक ज्यू व्यक्ति के घर में हमें उसकी स्थापना करनी पड़ी थी। आगे उसने भी हमें ठगते हुए किराए में बढ़ोतरी करनी शुरू की तो वहां से हमें यह छात्रावास ठाणे ले आना पड़ा। यहां भी, नामदार आगा खान के खुद लिख कर देने के बाद यह जगह हमारे हाथ में आने से पहले हमें बहुत कष्ट झेलने पड़े। अब, जब यह जगह मिल गई है तब यह सवाल फिलहाल हल हुआ समझिए। अपने छात्र बंधुओं से मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि नामदार (His Highness) आगा खान का यह बंगला, सरकारी ग्रैंट, सुपरिटेंडेंट चांदोरकर तथा उनकी मदद करने वाले अन्य सहकर्मियों की रातदिन की मेहनत आदि सुविधाएं आपको मिली हुई हैं। हमारे बचपन में हमें इनमें से कुछ भी नहीं मिलता था। इतनी सुविधाएं होने के बावजूद आपने उनका योग्य उपयोग नहीं किया, आप एखाद अंक से ही यदि फेल हो गए, तो ध्यान रहे कि यह हार केवल तुम्हारी नहीं होगी, अपितु इस संस्था पर भी आप नालायकी का ठप्पा लगाएंगे। सरकार की तरफ से उपलब्ध की गई मदद हटा ली जाएगी। नए अधिकार, बड़ी नौकरियां अगर हासिल करनी हैं तो पहले अपने को उनके लायक बनाना होता है। इस तरह अपने को लायक बनाने की प्रक्रिया के दौरान आप जब छात्रावस्था में होते हैं तब किसी और आंदोलन में आपका शरीक होना गलत होगा, यह आपके सामने मैं दूसरा मुद्दा रख रहा हूं और मेरा तीसरा मुद्दा है स्वावलंबन। यहां आपकी आर्थिक मदद के लिए शहर के अमीर लोगों को हम बुलाएंगे। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि आप, आपके भाईबंद और आपके जातभाई जब तक इस बात का निश्चय कर जुट नहीं जाते कि, जो हो सो हो, हमें तो आगे निकल जाना ही है, रोजमर्रा के जीवन में जब तक इस निश्चय पर आप अमल नहीं करते तब तक आपको अपने उद्देश्यों में सफलता हासिल नहीं होगी। मैं उम्मीद करता हूं कि इन सब बातों पर आप लोग गौर करेंगे और सफलता के मार्ग पर आगे चल कर कामयाबी को हासिल करेंगे, इसी उम्मीद के साथ मैं अपनी बात पूरी करता हूं।“