68. नकली और स्वघोषित नेताओं से सावधान रहें - अप्रैल 1933 मुंबई - Page 402

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या उनमें एकता क्यों नहीं कराई जाती? लेकिन झगड़ा जब व्यक्तिनिष्ठ हो तब कोई क्या कर सकता है? सिद्धांतों की तो बात ही निराली है। महात्मा गांधी द्वारा मंदिर मामले में मेरा पक्ष पूछा तब मैंने उनसे कहा था, मंदिर प्रवेश के साथ अगर जातिभेद मिट रहा हो, तो मैं यह चाहूंगा। अगर नहीं, तो हमें मंदिर में प्रवेश की जरूरत नहीं है। इस विवाद में सिद्धांत है।

इन नेताओं की झड़प में ऐसा कुछ भी नहीं है। यह सब देखकर मुझे इस बात की खुशी जरूर है कि उनकी लाख कोशिशों के बावजूद आपमें आपसी फूट नहीं आई है। आप उसमें उलझे नहीं हैं। अपनी आजादी के लिए इन्सान के पास या तो नौकरी हो या बाप-दादाओं की संपिŸा हो। अगर ऐसा नहीं है तो चोरी करके, भीख मांग कर या किसी और की जीहुजूरी करते हुए पेट भरना पड़ता है। हमारे कई लोग बेरोजगार हैं और समाज के अन्य वर्गों के पास बहुत पैसा है। अगले चुनावों के समय हालात ये होंगे कि अन्य वर्ग के लोग अपने लोगों को पैसा देकर हमारे मत खरीदने की कोशिश करेंगे। हममें से बेरोजगार और जो स्वाभिमानविहीन नेता उनकी मदद भी करेंगे। इसलिए कहता हूं कि ऐसी बातों से आपको सावधान रहना होगा। ऐसे नकली और स्वघोषित नेताओं से सावधान रहिए।

डॉ. अम्बेडकर के काम में रुकावटें डालने के लिए वरिष्ठ वर्ग के लोग तैयार ही बैठे रहते हैं। ऐसे लोग हममें से उन लोगों से ताल्लुक बढ़ाएंगे ही जो घूसखोरी के आदी हों। मैं हिंदुस्तान में नहीं होता तब ऐसे लोगों की बन आती है, यह मैंने देखा है।

मैं इस महीने की 22 तारीख को विलायत जा रहा हूं। इसलिए कह रहा हूं, सावधान रहें। मेरे पीछे ये लोग आपमें आपसी फूट डालने की कोशिश करेंगे। उम्मीद करता हूं कि किसी की बातों में न आकर आप अपनी एकता को बनाए रखेंगे। आज के इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए सबके प्रति आभार प्रकट कर मैं आज का अपना भाषण समाप्त करता हूं।’’