69. तुम्हें ही अपनी जिम्मेदारियों को पहचानना होगा - अप्रैल 1933 मुंबई - Page 404

387

जो तारीफ की है उससे मेरी जिम्मेदारी बढ़ी है। आप मुझसे किसी कार्य की उम्मीद रखते हैं। कई बार मुझे लगता है कि समाज की जिम्मेवारी न लेते हुए अगर मैं अकेला रहता तो शायद मैं अधिक भाग्यशाली होता। मेरी इच्छा थी कि मेरी सारी जिंदगी छात्रावस्था में बीते। इसीलिए, जीभ पर लगाम देकर भी मैंने कई किताबें

खरीदीं। प्रोफेसर की नौकरी कर किताबें पढ़ते हुए आराम से जिंदगी बिताने की मेरी पहली इच्छा थी। सौभाग्य से कहिए या फिर दुर्भाग्य से, मुझे अस्पृश्यों के आंदोलन में हिस्सा लेना पड़ा। अब इससे अलग होने से मुझे डर लगता है। अस्पृश्य समाज की जिम्मेदारी लेना आसान काम नहीं है। केवल प्रशंसा करते हुए या सभाएं लेकर इनकी समस्याएं हल नहीं होने वाली। ऐसा होता तो इससे पहले ही सब समस्याएं

खत्म हो जातीं। मेरे पास हर रोज 25-30 खत आते हैं। वे खत अगर कोई पढे़ तो उसका दिल पसीज जाएगा। उनकी समस्याएं हल करने के लिए प्रतिदिन काम करने वाले लोग मुझे चाहिए। आपमें जो थोडे़-बहुत लोग हैं वे मेरे बुरे गुणों के कारण या कहिए कि आपके बुरे भाग्य के कारण कहिए, मेरे साथ काम करने के लिए तैयार नहीं हैं। केवल काम करने वाले लोगों के अभाव के साथ-साथ रुपयों की भी किल्लत है। मेरे पास जो भी आते हैं वे हाथ हिलाते हुए ही आते हैं, उनके पास पैसा नहीं होता। न पैसा, न आदमी और न बुद्धिमŸा मेरे साथ है। इस तरह इस समाज का काम करना बड़ा कठिन है। डॉ. सोलंकी मुझे इस काम से मुक्त कराएं। अन्य समाज के लोग उम्र के चौथे पड़ाव में यानी 50 वर्ष पूरे करने के बाद सामाजिक कार्य करने लगते हैं। लेकिन मुझे उम्र के 25वें साल में ही सामाजिक कार्य शुरू करना पड़ा। अब अपने समाज को राजनीतिक सŸा मिली है। इसके बाद समाज को मेरी विशेष आवश्यकता होगी ऐसा मुझे नहीं लगता। पढे़-लिखे लोग तैयार हो रहे हैं। अभी भी अगर जीवन के कुछ वर्ष मुझे मिल जाएंगे तो मैं निजी हित साध सकता हूं। आप अपने पैरों पर खडे़ हो जाइए। डॉ. सोलंकी या मेरे बारे में अगर किसी को बुरा लगता हो तो वे हमें बताएं। हम यह सब छोड़ देंगे। इसके लिए हम हमेशा तैयार हैं। सभी जिम्मेदारी अब से आगे मैं ले नहीं सकता। सार्वजनिक कार्य की सामग्री आपको तैयार करनी होगी। अब तक काँग्रेस ने अपने आंदोलन पर 2 करोड़ रुपयों से भी अधिक राशि खर्च की होगी। मुसलमानों ने लगभग उतनी ही या उससे अधिक राशि अपने आंदोलन के लिए खर्च की होगी। हमारे लोगों ने अपने आंदोलन के लिए कितना खर्च किया? हद हो गई तो दो-तीन हजार रुपए! ऐसे सौदे में मैं फंसा हूं। लेकिन अब इससे आगे आपको अपनी जिम्मेदारी पहचाननी होगी। कई दिनों से यह बात मेरे मन में थी, जो आज मैंने साफ-साफ शब्दों में आपके सामने व्यक्त की है। उसे आप लोगों ने सुना इसके लिए आपके प्रति आभार व्यक्त करते हुए मैं आपसे विदा लेता हूं।’’