5. घनघोर संग्राम करने पर ही मनुष्यता वापिस मिलेगी - 11 अप्रैल, 1925 निपाणी (बेलगांव जिले) - Page 41

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घनघोर संग्राम करने पर ही मनुष्यता वापिस मिलेगी

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने बहिष्कृत हितकारिणी सभा की तरफ से जिले में जनजागृति के लिए सभा करने का कार्यक्रम घोषित किया। बेलगांव जिले के निपाणी गांव में - ”मुंबई इलाका प्रांतीय बहिष्कृत परिषद तीसरा अधिवेशन“ - इस सभा का आयोजन बाबासाहेब की अध्यक्षता में दिनांक 10 और 11 अप्रैल, 1925 को हुआ। सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिनांक 11 अप्रैल, 1925 को डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

”इस देश में आजकल जो घटनाएं घट रही हैं उसमें हमारे लिए अत्यंत प्रिय घटना है वैकम (वायकोम) का सत्याग्रह। इस सत्याग्रह को लेकर मुझे जो विचार सूझे उन्हें मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं-

वैकम में कौन-सा विवाद है यह ज्यादातर लोग जानते हैं। जिस रास्ते पर सभी लोग और जानवर भी जाते हैं उस रास्ते पर हम भी जा सकते हैं ऐसा वैकम के अस्पृश्यों की भी मांग है। इस सत्याग्रह में जो कुछ परिवर्तन हुए उन सबसे हमारा ज्यादा लेना-देना नहीं है। गौरतलब बात यह है कि यह सत्याग्रह सालभर से अधिक समय तक चलने के बाद आखिर असफल रहा। यह सही है कि इस सत्याग्रह से कुछ राजनीतिक नेताओं का नजरिया बदला है। यह अब सिद्ध हो गया है कि पहले राजनीतिक और फिर सामाजिक वाली मीमांसक सोच एकदम नादानी भरी है। क्योंकि इतने दिनों तक राजनीति पकाने के बाद राजनीतिक उद्देश्यों में कोई मसला बाधक बन रहा है तो वह सामाजिक ही है। सामाजिक मुद्दे इतने महत्वपूर्ण हैं कि उनको कितना भी स्थगित करने की, लटकाने की कोशिश की गई तो वह सामने आ खडे़ होते हैं। जिन दिग्गज राजनीतिज्ञों ने सामाजिक मुद्दों को दरकिनार कर केवल राजनीति ही की और दूसरों को भी इसके लिए मजबूर किया उन्हें कुछ भी साध्य नहीं हुआ। इतना ही नहीं, तो सामाजिक मुद्दों की उपेक्षा करके उन्होंने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की सफलता को मुश्किल बना दिया। आज की परिस्थिति इसकी गवाही दे रही है। यदि उन्होंने सही समय पर सामाजिक समस्याओं को अपने हाथ में लिया होता तो आज हर जगह दिखाई देने वाली मनमुटाव और फूट दिखाई न देती! इस देश में महात्मा गांधी से पहले यह बताने वाला कोई ऐसा नेता नहीं हुआ जिसने कहा हो, इस मनमुटाव और फूट को खत्म करने के लिए हो रहे सामाजिक अन्याय को दूर करना सबसे महत्वपूर्ण काम है और हर भारतीय को इसे अपना पवित्र कर्तव्य मान कर पूरा करना चाहिए। उनकी दृष्टि में सामाजिक और

* डा.ॅ भी. रा. अम्बेडकर चरित्र - चां, भ. खैरमोडे, खंड 2, पृष्ठ 121-126