72. अंग्रेज सरकार इस देश में कुछ नहीं करती है - अप्रैल 1933 (मुंबई) - Page 411

394 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर बहुत ही निर्भिमानी हैं। सरकार ने उन्हें जे. पी. नाम देने का प्रस्ताव रखा लेकिन वे लेने के लिए तैयार नहीं थे। डॉ. अम्बेडकर बहुत ही निस्पृह व्यक्ति हैं। गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने जो भाषण दिए हैं उनसे इस बात का पता चलता है। मुंबई काउंसिल में उनके जैसा स्पष्ट वक्ता नेता नहीं मिलेगा। अपने समाज के हित के आगे वे किसी की परवाह नहीं करते। तीनों गोलमेज सम्मेलनों और अबकी संयुक्त संसदीय कमेटी में बिना कोशिशों के बुलाया गया, इसी से उनकी योग्यता का परिचय मिलता है। अब भी वे अपना काम योग्य तरीके से करेंगे इस बारे में किसी को शंका नहीं होनी चाहिए।“

बाद में रा. पी. एल. लोखंडे ने नासिक जिले की ओर से दिया जाने वाला मानपत्र पढ़ कर सुनाया। फिर इसे चांदी के चषक में रख कर वह बाबासाहेब अम्बेडकर को अर्पण किया गया। 501 रुपयों की थैली भी नासिक जिले की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को अर्पण की गई। उसके बाद हरिभाऊ हनुमंत रोकडे़ ने पुणे की ओर से मानपत्र का मसौदा पढ़ कर सुनाया। अध्यक्ष के हाथों मानपत्र की दो प्रतियां बाबासाहेब को दी गईं जिनमें से एक सुनहरे फ्रेम में सुनहरे अक्षरों से लिखी हुई थीं और एक अन्य सादी प्रति थी।

पुणे जिले की ओर से थैली अर्पण करते हुए रा. शांताराम अनाजी उपशाम ने कहा कि, इससे पूर्व डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के काम में सहायता के लिए पुणे जिले की ओर से 350 रुपयों की एक टाइपराइटिंग मशीन अर्पण की गई थी। आज यह सिलसिला आगे बढ़ाते हुए यह 200 रुपयों की थैली अर्पण की जा रही है। यह कह कर उन्होंने अध्यक्ष के हाथों थैली डॉ. बाबासाहेब के सुपूर्द की। उसके बाद नायगाव चाल के निवासियों की ओर से डॉ़ अम्बेडकर को 91 रुपयों की थैली अर्पण करने के लिए रा. विट्ठल तानाजी साकरे खडे़ हुए। उन्होंने कहा, समयाभाव के कारण हम इससे बडे़ कार्यक्रम का आयोजन कर नहीं पाए। विनती है कि हमारी इस छोटी सी थैली का डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर स्वीकार करें। इतना कहते हुए उन्होंने 91 रुपयों की थैली अध्यक्ष के हाथों डॉ. अम्बेडकरको अर्पण की। उनके बाद ट्राम कंपनी की चाल, चौथा माला, परेल के पंचों की ओर से डॉ. अम्बेडकर को 50 रुपयों की थैली रा. चांगू बहेरु गाडे ने अर्पण की। भोर संस्थान के कुछ लोगों ने 17 रुपयों का चंदा दिया।

बाद में समता सैनिक दल की ओर से फूलों की माला अर्पण करने के लिए रा. सालवी खडे़ रहे। माला अर्पण करते हुए उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि समता सैनिक दल के सैनिकों का सेना में प्रवेश कराने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर कोशिश करेंगे। उसके बाद बांद्रा के डिलाइल रोड आदि जगहों के लोगों की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को कई मालाएं अर्पण की गईं।