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उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। उन्होंने कहा,
”अध्यक्ष महोदय और मेरे प्रिय भाइयों और बहनों,
आज इस समारोह के लिए आप सब लोग यहां इकठ्ठा हुए हैं यह मेरी नजर में बडे़ संतोष की बात है। क्योंकि, अगर पहले जैसे सोचा गया था, वैसे अगर हरेक जिले के लोगों द्वारा अलग-अलग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया होता, तो हर जगह उपस्थित रहना मेरे लिए असंभव हो जाता। इसके अलावा, आज जितने लोग इकट्ठा हुए हैं उतने लोगों के इकट्ठे होने का मौका भी नहीं बनता। एक और बात अच्छी हुई है कि कल मुझे विदा करने के लिए सबका बंदरगाह पर आना भी अब टल गया है। आज यहीं मैं आपसे विदा लेता हूं और आप मुझसे विदा लीजिए। बंदरगाह पर आकर आप लोग जो जयकार और हल्ला-गुल्ला मचाते हैं उससे मैं
खुद बौखला जाता हूं। मेरे साथ पानी वाले जहाज से जाने वाले प्रतिनिधियों को भी शायद संकोच महसूस होता हो। कई लोगों को विदा करने के लिए चार लोग भी नहीं आते। मैं इसके लिए अपवाद हूं। क्योंकि मुझे विदा करने के लिए बंदरगाह पर ऐसी भीड़ उमड़ती है कि कोई कीडा या चींटी भी घुस न पाए। असल में यह कोई अच्छी बात नही है। गरीब लोग अपना रोजगार छोड़ कर बंदरगाह पर केवल मुझे विदा करने के लिए आकर खड़े रहें, यह मुझे उचित नहीं लगता और पसंद भी नहीं है। इसलिए कल कोई भी बंदरगाह पर ना आएं। जो भी कुछ कहना-सुनना हो, वह यही एक-दूसरे से कहा सुना जा सकता है। जिन जिलों की तरफ से मानपत्र दिए गए हैं उन संस्थाचालकों के प्रति मैं अपना आभार प्रकट करता हूं।
पिछले माह नगर जिले के मानपत्र देने वाले समारोह में मेरे भाषण का इतना, ऐसा और इतनी जल्दी असर होगा मैंने सोचा नहीं था। लेकिन आपको सामाजिक कार्य का अहसास पूरी तरह होने के कारण सामाजिक कार्य को बढि़या ढंग से चलाया जाए इसलिए एक होकर कम समय में ही आप लोगों ने आज जो थैलियां अर्पण की हैं उनके लिए मैं आप सबका आभारी हूं।
कल और आज मुझे जो कोष मिला है, उसका इस्तेमाल मैं सामाजिक कार्य के लिए ही करने वाला हूं। मैंने इसके लिए एक योजना बनाई है। समाज के लोगों को अच्छा धन मिलता रहे, ऐसी कोई व्यवस्था करने का विचार लंबे समय से मेरे मन में था। बच्चे स्कूल में जाकर अच्छी शिक्षा प्राप्त करें उसी तरह युवक और युवतियों को भी सुधारोन्मुखी, बढि़या ज्ञान प्राप्त होते रहने की जरूरत है। इसके लिए कम से कम चार आने कीमत वाली, अच्छी जानकारी वाली किताबें प्रकाशित करने के लिए एक संस्था की स्थापना करने का मेरा विचार है। इसी योजना पर कल और आज मिली रकम मैं लगाने जा रहा हूं।