72. अंग्रेज सरकार इस देश में कुछ नहीं करती है - अप्रैल 1933 (मुंबई) - Page 413

396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गोलमेज सम्मेलन के बारे में आज यहां कुछ कहना जरूरी है ऐसा मुझे नहीं लगता। अब वह परिषद पुरानी हो गई है। इस बासी सम्मेलन के बारे में कुछ कहूं ऐसा मुझे नहीं लगता। गोलमेज सम्मेलन के तीन चक्कर कट चुके हैं और अब मैं चौथे सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहा हूं। यह आखिरी बारी है। इसके बारे में विशेष कुछ कहने की मेरी इच्छा नहीं है। एक बात सच है कि, पिछले चार वर्षों में अस्पृश्यों के कार्य की बड़ी जिम्मेदारी मेरे माथे पर थी। वह नहीं होती तो शायद मेरी राजनीति कुछ अलग ढंग की होती। उस वक्त मैं दो पेंचों में फंसा था। अंग्रेजों से भिड़ता तो गांधीजी से कोई फायदा नहीं मिलता, और गांधीजी की सहायता करता तो अंग्रेजों से कोई लाभ नहीं मिलता। इसलिए मैंने व्यापक ढंग के सामाजिक कार्य को नजरंदाज कर रखा था। मेरी मनोदेवता अब मुझसे कह रही है कि अब भले किसी भी तरह का स्वराज आए, अस्पृश्यों का फायदा ही होने वाला है। इस बारे में जो भी कमियां हैं,मैं उन्हें दूर करने की कोशिश करने वाला हूं। लेकिन अब अस्पृश्यों के कार्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत मुझे नहीं लगती।

अस्पृश्यों को केवल राजनीतिक सŸा प्राप्त होना पर्याप्त नहीं है। राजनीतिक सŸा हमें मिले और अंग्रेजों का ही राज रहे, तो हमें 15-20 या 25 का भी प्रतिनिधित्व मिला तो भी वह किसी काम का नहीं होगा। भोज की पंगत में साथ बैठने का हक पाने के बाद पŸाल में भरपूर खाना परोसा जाएगा, इसका भी खयाल रखा जाना चाहिए। सो इस तरह अंग्रेज सरकार से इस देश को अब मैं विशेष हक दिलाने के लिए लड़ने वाला हूं। जो लोग विदेश जाकर लौटते हैं, वे एक बात जानते हैं कि हमारे देश में दरिद्रता बहुत है। यहां बीमार, गरीब लोगों के लिए कोई सुविधाएं नहीं हैं। उस हिसाब से इंग्लैंड में बहुत सारी सुविधाएं दी जाती हैं। वहां, जिन्हें जरूरत हो लेकिन जो खरीद नहीं सकते उन सब लोगों के लिए सरकार की तरफ से डॉक्टर की व्यवस्था की जाती है। किसी के पास अगर कमाई का जरिया न हो तो सरकार उसे नौकरी मिलने तक बेकारी का भŸा देती है।

साठ साल से बड़ी उम्र के लोगों की कोई व्यवस्था न हो तो सरकार उसे बुढ़ापे की पेंशन देती है। गरीब लोगों को ज्यादा मकान-किराया न देना पडे़ इस बात का भी वहां सरकार खयाल रखती है। ऐसे मामलों में सरकार मकान मालिक को ग्राँट देकर लिखवा लेती है कि वह किराएदार से अधिक किराया नहीं लेगा।

वहां प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य है और वह मुफ्त दी जाती है। इतना ही नहीं माध्यमिक और कॉलेज की पढ़ाई भी वहां मुफ्त दी जाती है। लेकिन वही अंग्रेज सरकार इस देश में कुछ नहीं करती।