397
मुंबई में जल्द ही एक संकट आने की संभावना है। यहां के मिल मालिक कामगारों के वेतन कम कर रहे हैं, जिसके कारण हड़ताल होकर मिलें बंद होती जा रही हैं। लेकिन यहां की सरकार इस तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही। इंग्लैंड, जर्मनी आदि देशों में अगर ऐसे हालात पैदा होते तो वहां की सरकार चुप नहीं बैठती।
शांति कायम रखने के अलावा अपना और कोई कर्त्तव्य अगर यह सरकार नहीं मानती तो उस वजह से यहां की प्रजा को सुख और शांति मिलना संभव नहीं। केवल राष्ट्र के लिए ही नहीं आप लोगों के लिए भी यहां के लोगों को व्यापक सŸा मिलना निहायत जरूरी है। इसीलिए अंग्रेज सरकार के हाथों से सŸा छीन लेने की कोशिश मैं करने वाला हूं। अभी जो मानपत्र मुझे दिए गए हैं उनमें से एक में कहा गया है कि, सुदामा की पोटली की तरह हमारी इस तुच्छ भेंट का स्वीकार करें।
इस बारे में मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि सुदामा के पोहों से कुछ नहीं होने वाला। आप लोगों को स्वर्ग में अच्छी जगह मिले, इसलिए मेरी कोशिशें नहीं चल रही हैं। वह मेरा काम भी नहीं है। इस लोक में ही आपके क्लेश कम हों, आपको सुख मिले यह मेरी कोशिश है। उसके लिए छनछन बजते पैसों की जरूरत है, वह मैं आपसे लेना चाहता हूं और आपने वह मुझे देनो चाहिएं।