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बुद्धि का उपयोग रोटी, शिक्षा और राज्य की सŸा पाने के लिए हो
(वसई के सोपारे गांव में दिया भाषण)
”अध्यक्ष महाराज, और मेरे प्रिय भाइयों और बहनों,
श्री वनमाली के कहे अनुसार पहले ही यह परिषद होनी थी। लेकिन मुझे तीसरे गोलमेज सम्मेलन में बुलाया गया था इसलिए मैं सभा में उपस्थित नहीं हो पाता और लोगों को निराशा होती। खैर, आज का कार्यक्रम जिस चेवली चमार समाज के लोगों ने आयोजित किया उनका मैं इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों से बातचीत का मौका उपलब्ध कराने के लिए श्ुक्रिया अदा करना चाहता हूं। पहले गोलमेज सम्मेलन के लिए मैं जब लंदन गया था तब मेरी बड़ी बुरी हालत हुई थी। उस समय हिंदू-मुसलमान सदस्यों में मनमुटाव होने के कारण अस्पृश्यों की समस्याएं सामने रखना बहुत मुश्किल हो गया था। आखिर तक हमारी राय एक न होने की वजह से पहला साल बेकार गया, ऐसा हम सब लोगों को लगा था। साथ ही उस समय काँग्रेस और उसके सर्वाधिकारी महात्मा गांधी परिषद से अलिप्त ही रहे। सभी हिंदी सदस्यों ने आशा व्यक्त की थी कि दूसरी गोलमेज सम्मेलन में कुछ ठोस काम हो पाएगा। लेकिन उनकी आशांओं पर फिर पानी फिर गया। उस समय गोलमेज सम्मेलन के सभी सदस्यों में ऐसी फूट पड़ी कि कोई भी सवाल हल नहीं किया जा सका। उसके जिम्मेदार केवल महात्मा गांधी ही थे। एक तरफ मुसलमान एक तरफ स्पृश्य हिंदू और बीच में अल्पसंख्यक अस्पृश्य आदि जातियों के प्रतिनिधि जैसे हालात होने के कारण मैं थोड़ा परेशान हो गया था। मुझे यकीन नहीं था कि महात्मा गांधी अस्पृश्यों के लिए कोई अलग योजना बना लेंगे। क्योंकि, दूसरी परिषद में जाने से पहले उनके और मेरे बीच हुई बातचीत मैं यही समझा पाया था। हालांकि, अस्पृश्यों के बारे में मैं जो योजना सामने रखूंगा उसका महात्माजी विरोध नहीं करेंगे इसका मुझे पूरा विश्वास था। हालांकि सब उलटा हुआ। ‘औरों द्वारा पसंद की गई अस्पृश्यों की योजना का मैं विरोध नहीं करूंगा’ यह हिंदुस्तान में रहते हुए जिस महात्माजी ने कबूला था, मुझे लगभग वचन दिया था, वही महात्माजी सिक्ख और मुसलमानों को कोरे कागज पर हस्ताक्षर करके देने के लिए तैयार हो गए। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि सूई की नोक पर आएं उतने अधिकार देने के लिए भी मैं तैयार नहीं हूं। महात्माजी की इस प्रतिज्ञा के कारण अपने समाज के हित के लिए मुझे अल्पसंख्यकों के गुट से हाथ मिलाना पड़ा। महात्मा जी का कहना था कि स्पृश्य
‘जनता’ 29 अप्रैल, 1933। भाषण की तारीख दर्ज नहीं है।