73. बुद्धि का उपयोग रोटी, शिक्षा और राज्य की सत्ता पाने के लिए हो (वसई के सोपारे गांव में दिया भाषण) - 1933 - Page 417

400 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

गांधी मंदिरों के द्वार खुलवाने में लगे हुए हैं। हिंदू लोग मंदिरों के दरवाजे खोलें या उन पर सात-सात ताले लटकाएं मुझे उनकी परवाह नहीं। हिंदू युवक अगर जर्मन राजनीति का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि नाझी पक्ष कम्युनिस्टों के खिलाफ लड़ रहा है। एक ही राष्ट्र के लोग न्याय पाने के लिए एक-दूसरे का खून बहा रहे हैं। 1863 के साल में अमेरिका में नीग्रो लोगों को गुलामी से मुक्त करने के लिए उŸार और दक्षिण के गोरे आपस में लडे़, हिंदी युवकों की समझ में यह बात आती नहीं। अस्पृश्यता निवारण के लिए चार हिंदू युवक अगर चार सनातनियों के सिर फोड़ते, युवकों का थोड़ा बहुत खून गिरता तो ऐसा क्या अनर्थ होने वाला था? लेकिन यहां कोई असल में अस्पृश्यता का निवारण नहीं करना चाहता। खैर, हिंदू धर्म और समाज का जो होना हो वह हो, अस्पृश्यता का निवारण किया जाए या न किया जाए, आप अपना ध्यान उसमें ना लगाएं। महार-चमार के आपसी भेद को भुलाकर एकता और संगठन को बढ़ाइए। जो राजनीतिक अधिकार प्राप्त हुए हैं उन्हें जतन करने में अपना तन-मन-धन लगाएं, इतना कह कर मैं आपसे विदा लेता हूं।’’