हिंदू समाज अपनी शक्ति का उपयोग ईमानदारी से समाज सुधार के
लिए करे *
ऐसा, हिंदू महासभा वाले चीखते-चिल्लाते कहते रहते हैं कि डॉ. अम्बेडकर
अस्पृश्यों के वास्तविक प्रतिनिधि नहीं हैं। लेकिन अम्बेडकर के सहयोग के बगैर
वे कुछ नहीं कर पाते। इसीलिए इस महीने के पहले सप्ताह में विलायत में ‘वाइट
पेपर’ के बारे में विचार-विमर्श कर उसकी व्यर्थता ब्रिटिश जनता के सामने उजागर
करने के लिए, प्रचारक मंडल की नियुक्ति करने के लिए हिंदू नेताओं की सभा बुलाई
गई थी। इस सभा में डॉ. गौर, डॉ. अम्बेडकर, डॉ. मुंजे, सच्चिदानंद सिंह और पं.
नानकचंद आदि लोगों के भाषण हुए। सबके भाषण सुनने के बाद डॉ. बाबासाहेब
अम्बेडकर भाषण देने के लिए उठ खड़े हुए।
डॉ. अम्बेडकर भाषण देने के लिए जेसे ही खडे़ हुए तो सभी नेताओं को उनके
बोलने के बारे में उत्सुकता हुई। डॉ. मुंजे तो डॉक्टर साहब को अपने पक्ष में शामिल
करवाने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे थे। डॉक्टर साहब ने जो भाषण दिया उसका
सारसंक्षेप इस तरह था -
‘‘हिंदुस्तान में आज जो अस्पृश्य वर्ग अस्तित्व में हैं, उसकी सर्वांगीण उन्नति के
लिए पृथक चुनाव क्षेत्र की मांग की जा रही है, तो उसके लिए पूरी तरह से हिंदू
समाज ही जिम्मेदार है। आज यदि हम संयुक्त हिंदू समाज की स्थिति का सूक्ष्म
अवलोकन करें तो ध्यान में आएगा कि अस्पृश्य समाज को संयुक्त चुनाव क्षेत्र से
अपनी आजादी पाना कभी भी संभव नहीं होगा। खुली आंखों से यह स्थिति देखने
के बाद जिसका स्वाभिमान जागृत हुआ, जो स्वावलंबन के महत्त्व को जानता है,
उसे केवल मजबूरी के कारण ही अलग चुनाव क्षेत्र की मांग करनी पड़ी। हिंदू
नेताओं ने अस्पृश्य समाज का केवल अपने स्वार्थ के चलते ही इस्तेमाल किया।
मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों की बात सामने आते ही स्पृश्य हिंदुओं के
डर ने फिर सिर उठाया और एक बार फिर अस्पृश्यों के प्रति उनका प्यार उमड़
पड़ा। उनका यह प्यार केवल दिखावे का था। सो, मैं अपने हिंदू नेताओं से सिर्फ
इतना ही कहना चाहता हूं कि, हिंदू समाज अपनी कृति से अस्पृश्य समाज का
विश्वास संपादन करे। मुसलमानों के साथ भिड़ने में अपना समय और शक्ति का
अपव्यय न करें। अपने समाज के सामाजिक विकास पर ही अपनी सारी शक्ति
* ‘जनता’ 15 जुलाई, 1933 भाषण का स्थान और तारीख नहीं दी गई है।