74. हिंदू समाज अपनी शक्ति का उपयोग ईमानदारी से समाज सुधार के लिए करे - 1933 - Page 419

402 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

व्यय करें। इस तरह अगर हिंदू समाज अपने कार्यक्रम का भविष्य में आयोजन करेगा तो अस्पृश्य समाज को भी हिंदू समाज के साथ मिल कर कार्य करने में उत्साह, उम्मीद पैदा होगी।

डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बाद डॉ. मुंजे का भाषण हुआ। उन्होंने डॉक्टरसाहब के भाषण से मौका उठाते हुए उनसे हिंदू महासभा का अध्यक्ष पद स्वीकारने की विनति की। लेकिन डॉ. मुंजे को एक बात हमेशा ध्यान में रखनी होगी कि ऐसे प्रलोभनों का डॉ. अम्बेडकर कभी शिकार नहीं बनने वाले। महात्मा गांधीजी के साथ करार करते हुए भी उन्होंने कभी खुद के मानापमान को या अपनी कीर्ति को महत्त्व नहीं दिया। अपने समाज के सर्वांगीण हित के लिए जो बातें सहायक होंगी केवल वही वे आज तक करते आए हैं। हिंदू महासभा वालों को यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए।