75. कितने दिनों तक गुलामी का अपमान सहें? - सितंबर 1934 परेल (मुंबई) - Page 424

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समाज के कई जिम्मेदार नेता और संस्थाओं के हाल के आंदोलन देखने और उनके वक्तव्य सुनने के बाद मेरे मन में आशंका पैदा हुई है कि हिंदू समाज पुणे समझौते पर ईमानदारी से अमल भी करेगा। इसीलिए मैं कहता हूं कि हमें जागरुक रहते हुए अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

आज के कुछ वक्ताओं ने पुणे समझौते को गांधी-अम्बेडकर समझौता कहा। लेकिन यह बात गलत है। इस समझौते पर महात्मा गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं। महात्मा गांधी हिंदुओं के नेता नहीं माने जाते। सही मायनों में हिंदुओं के नेता हैं पं. मदन मोहन मालवीय जी। अखिल भारतीय हिंदू समाज के नेता के रूप में उस समय उन्हीं के नेतृत्व में बातचीत चल रही थी। इसी नाते करार पर पहले हस्ताक्षर उन्हीं के हैं। अपने सर्वमान्य नेता के शब्दों के प्रति अगर हिंदू समाज के मन में सम्मान नहीं है, तो कहना पडे़गा कि उस समाज के जैसा कृतघ्न और बेशर्म समाज कोई दूसरा नहीं होगा, हालांकि मुझे उम्मीद है कि हिंदू नेता अपने कहे का मान रखेंगे।

मुझे लग रहा है कि आज आप सब लोग यहां इकट्ठा हुए हों तो वह यह दिखाने के लिए कि अस्पृश्य समाज अपने कहे शब्दों का सम्मान करता है, लिहाज रखता है। लेकिन साथ ही मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि पिछले साल से पुणे करार दिन मनाने की जो प्रथा आप लोगों ने शुरू की है, उसे केवल एक प्रथा के रूप में न मनाएं। साल भर में किसी दिन एक जगह इकट्ठा होकर अन्य उत्सव मनाते हैं, उसी तरह यह उत्सव भी मनाना, 2-5 वक्ताओं के भाषणों का आयोजन कर खुश हो जाना काफी नहीं है। यह दिन इतने सादे और हीन तरीके से मनाया जाने लायक नहीं है। पुणे करार अस्पृश्यों के जीवन का एक अविस्मरणीय प्रसंग है। इस करार के द्वारा हमारे समाज ने दबंग माने जाने वाले हिंदू समाज को हमारा अस्तित्व मानने पर मजबूर किया। इसीलिए इस दिन को हम अपने राजनितिक दिन के तौर पर मनाएं। पुणे करार के अनुसार अपने समाज को मिले अधिकार सही ढंग से प्रयोग में लाए जा रहे हैं या नहीं यह देखने के लिए आज के दिन हमें इकट्ठा होना चाहिए।

मुंबई प्रांत के लिए आपको 15 उम्मीदवारों की जरूरत है। इन उम्मीदवारों का चुनाव करते समय आपको खास ध्यान रखना होगा। आपको सोचना होगा क्या यह उम्मीदवार हमारे समाज का सच्चा प्रतिनिधि है? अगर इन 15 प्रतिनिधियों में से 5 पूंजीपतियों के वश हुए और अन्य 5 हिंदू समाज के हाथों की कठपुतली बन गए तो बाकी बचे 5 उम्मीदवार क्या काम कर पाएंगे? इसीलिए इन 15 प्रतिनिधियों के बारे में आपको काफी दक्ष (सतर्क, चौकस, सावधान) रहना होगा। तभी जो अधिकार हमें मिले हैं, उनका सही उपयोग किया जा सकेगा। अस्पृश्य समाज की कुछ प्रगति होगी।