408 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आने वाले समय में हर किसी को कर्तृत्ववान बनने की कोशिश करनी होगी। पिता के नाम को भुनाने की लालसा को त्याग कर खुद कुछ कर दिखाने की महत्त्वाकांक्षा मन में रखनी चाहिए। इस बारे में एक सादा दृष्टांत दे रहा हूं। एक सुभेदार के बेटे की कहानी मुझे याद आ रही है। उसकी जि़द थी कि लोग उसके पिता की तरह उसे भी सुभेदार बुलाएं। इसके लिए उसने अपने कमरे के दरवाजे पर लिखे नामपट्ट में भी सुभेदार की उपाधि लिख रखी थी। जो सुभेदार कहकर बुलाता उसी के यहां वह जाता। जाहिर है कि लोग जानते थे कि उसके पिता ने सेना में मेहनत की थी, जिसके सम्मानस्वरूप उन्हें यह उपाधि दी गई थी। बेटे ने वह नहीं कमाई थी, इसलिए लोग उसे यह उपाधि बहाल करने के लिए तैयार नहीं थे। उस शख्स ने किसी भी तरह अपनी योग्यता बढ़ाने की कोशिश नहीं की। अपनी मूर्खता का केवल प्रदर्शन कर वह लोगों की हंसी-ठट्ठा का कारण बना। इसीलिए, भूतकालीन बड़प्पन के बारे में झूठा, वृथा गर्व करना बेकार है। बड़प्पन लाने के लिए इंसान को खुद ही कोशिश करनी चाहिए। बाप का बड़प्पन बेटे के काम नहीं आएगा। और योग्यता पाने का बेहतर उपाय है शिक्षा हासिल करना।
अगर उच्च शिक्षा का अभाव हो तो उच्च पद की नौकरियां आपको कैसे मिलेंगी? हाल ही में सरकार ने एक नोटीस निकाल कर बताया है कि मुसलमान समाज के लिए अलग-अलग विभागों में जगहें आरक्षित रखी गई हैं। उन जगहों के लिए लायक उम्मीदवार चुनना मुसलमान समाज में संभव है। अस्पृश्य समाज के लिए भी इस तरह का प्रबंध करने के लिए सरकार यदि तैयार भी है तो उन जगहों के लिए योग्य उम्मीदवार हमारे समाज में कहां से मिलेंगे? सरकार से अगर हमें यह जवाब मिले कि, आपके समाज के लिए नौकरियां आरक्षित की जानी चाहिए यह बात सही है लेकिन आप लोगों की जनसंख्या भले अधिक हो, उसमें पढे़-लिखे लोगों की कमी होने की वजह से इस तरह की व्यवस्था करना संभव नहीं है, तो हम क्या कर सकते हैं? इसीलिए मेरा कहना यही है कि अगर उंचे पद की नौकरियां पाकर समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाना चाहते हैं, तो अपने बच्चों को योग्य शिक्षा दिलाना हर व्यक्ति का कर्त्तव्य है।
पाठशाला की शिक्षा के साथ-साथ देश में क्या कुछ हो रहा है, इसकी जानकारी रखना भी जरूरी है। यह हमारे समाज का संक्रमण काल है, बदलाव का समय है। अस्पृश्य समाज आज पुराने जमाने से नये जमाने में प्रवेश कर रहा है। ऐसे महत्त्वपूर्ण समय में हमें बड़ी सावधानी बरतनी होगी। अलग-अलग क्षेत्रों में क्या हो रहा है, अपनी उन्नति के मार्ग में या हमारे बनाए हुए प्रगति के खाके की पूर्तता में कौन अडं़गा डाल रहा है, अपने समाज में प्रतिपक्ष के क्या मंसूबे हैं, नासिक में क्या हो