78. जो धर्म इंसान के साथ इंसानों जैसा व्यवहार नहीं करता उसे धर्म कैसे कहा जाए? - दिसंबर 1935 मुंबई - Page 439

422 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बोर्डिंग के दरवाजे के पास वाले पानी के छोटे से हौज के पास पहुंचा। यह हौज दो-ढाई फीट चौड़ा और चार-पांच फीट गहरा था। दुर्भाग्य से वह बच्चा हौज पर चढ़ा और संतुलन खो जाने के कारण हौज में गिर गया। यह बात बोर्डिंग में रहने वाले 20 बच्चों ने तथा उनके बूढ़े अध्यापक ने देखी। लेकिन उन्होंने बच्चे को हौज से बाहर निकाला नहीं। बच्चों ने यह खबर उस बच्चे के माता-पिता तक पहुंचाई। बड़ी देर के बाद मां-बाप आए और उन्होंने उस बच्चे को बाहर निकाला। फिर वे उसे अस्पताल लेकर गए। डॉक्टर ने बच्चे की जांच के बाद बताया कि बच्चा दो घंटे पहले ही मर चुका है। अब सवाल यह है कि उन बीस जैन बच्चों ने और उनके उस बूढे़ अध्यापक ने बच्चे को पानी से बाहर क्यों नहीं निकाला? इसका जवाब यही है कि वह बच्चा अस्पृश्य जाति में पैदा हुआ था। ऐसा है यह हिंदू धर्म। उससे इंसानियत की उम्मीद करना बेकार है। अस्पृश्यों को हिंदू समाज से कभी भी न्याय नहीं मिलेगा। हिंदू धर्म कोढ़ है। उससे अगर अस्पृश्य अपने आप को बचाना चाहते हैं, तो उनके सामने धर्म परिवर्तन का ही रास्ता है। नासिक के नादूर गांव की घटना के बारे में आप सब लोगों ने पढ़ा ही होगा। महार जाति की दो महिलाओं के पास घास के दो छोटे गट्ठर मिले। धर्मांतरण की घोषणा से चिढ़े हुए मराठों ने उन महिलाओं पर मराठों के खेतों से घास काट कर लाने का आरोप जड़ा। उन महिलाओं ने कई तरीकों से विनति करते हुए बताया कि ऐसा नहीं है, लेकिन लोगों ने उनकी एक ना सुनी। उन्हें पीड़ाएं दी गईं। लेकिन इतने से भी उन मराठों का मन नहीं भरा। उन्होंने महारों के खेतों में अपने ढोरों को छोड़ दिया। महारों की खड़ी फसल को तहस-नहस कर दिया। अस्पृश्यों के साथ स्पृश्य समाज ऐसा ही बर्ताव करता आया है। इसीलिए मैं कहता हूं कि हिंदू धर्म नर्क है। मुझे आपके धर्मांतरण के बारे में निर्णय लिए जाने की प्रतीक्षा है। मुझे आपका नेता होने की जरूरत नहीं है, और किसी तरह की कोई उम्मीद नहीं। अपनी उन्नति साधना मेरे अपने हाथों में है। मेरे साथ अगर धर्म परिवर्तन करना हो तो सभी मिल कर आइए। यहां एकाध दो महीनों में मुंबई इलाके के महार लोगों की परिषद होने वाली है। और आखिर हिंदुस्तान के सभी अस्पृश्यों की परिषद होगी। इसमें समय जरूर लगेगा। जितने समय की जरूरत हो सकती है, उतना समय मैं आपको दे रहा हूं। उतने समय में योग्य निर्णय लीजिए। धर्म परिवर्तन करना यानी करना क्या है? यह आज बताने का कोई मतलब नहीं है। जिस मकान में आप रह रहे हैं उसे खाली करना है इसका अगर आप निर्णय ले लें तो आगे किस मकान में जाना है यह तय किया जा सकता है। आप हिंदू धर्म में रहते हैं, क्योंकि आप निर्बुद्ध, मूर्ख हैं। आपको किसी बात की शरम नहीं है। आप नहीं जानते कि इन्सानियत कैसी होती है, इसीलिए आप अब तक इस धर्म में हैं। इतना कह कर मैं अपना भाषण पूरा करता हूं।“