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डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने येवला के अस्पृश्यवर्गीय परिषद में धर्म परिवर्तन
की घोषणा की, उसके बाद हिंदुस्तान में बडी हलचल मची। उनकी घोषणा के
कारण स्पृश्य हिंदू समाज हिल गया और अस्पृश्य लोगों की ओर से दिन-ब-दिन
अधिक संख्या में उनके निर्णय का स्वागत हो रहा है। बढता समर्थन प्राप्त हो रहा
है। उनकी घोषणा को महाराष्ट्र से समर्थन देने के लिए 11 और 12 जनवरी, 1936
को पुणे में अहिल्याश्रम के भव्य मैदान के मंडप में अखिल महाराष्ट्रीय अस्पृश्य
युवक परिषद ली गई थी। इस सम्मेलन के अध्यक्ष स्थान पर मद्रास के प्रसिद्ध नेता
रा. सा. प्रो. शिवराज, बी. ए., बी. एल. थे। सम्मेलन से पूर्व अध्यक्ष का पुणे के कैंप
इलाके की सड़कों पर भव्य जुलूस निकाला गया था। शाम 5.30 बजे सम्मेलन की
शुरुआत हुई। इस परिषद के लिए दस हजार महिलाएं और पुरुष हाजिर थे। सभा
में उपस्थित जनता में कुछेक स्पृश्य हिंदू, मुसलमान और सिक्ख समाज के लोग भी
थे। सर गोविंदराव माडगावकर, रा. सा. त्रिभुवन सेठ किराड, श्री भाऊराव पाटील,
श्री शांताराम पोतनीस, मि. अशरफ अली, मीर मुन्शी, भालदार, श्री आर. बी. भागवत,
डॉ. वि. म. बनाम अण्णासाहेब नवले, सरदार दरबारसिंह, सुभेदार घाटगे, सुभेदार धुत्रे,
महाड़ के श्री सुरेंद्रनाथ टिपणीस, श्री अ. वि. चित्रे, श्री सीताराम लांडगे अमृतसर के
सरदार गुरुमुखसिंह, स. तुलसी सिंह, स. दिवाण सिंह, स. नारायण सिंह, स. इन्द्र
सिंह, स. तेज सिंह, स. सुमेर सिंह, वे. अग्रवाल, एस. एस. जगताप, मि. जे. टी.
आल्हार, मि. ससाने, श्री तात्याबा शिंदे आदि लोग उपस्थित थे और इनके अलावा
बाहर से आए कई प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
अस्पृश्यों के प्रमुख नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकरसभास्थल पर थोड़ा विलंब से
पहुंचे। इससे शुरू-शुरू में लोग निराश हुए थे। इसीलिए मंडप के मुख्य हिस्से में
अध्यक्ष की कुर्सी के पास एक कुर्सी पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का फोटो रखा
था जिस पर फूलों की माला चढ़ाई हुई थी।
महाराष्ट्र अस्पृश्य युवक सम्मेलन में डॉ. सोलंकी के भाषण के बाद अस्पृश्य वर्ग
के लोकप्रिय नेता बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठ कर खडे़ हुए। उस समय
करीब पांच मिनटों तक लगातार तालियों की गड़गड़ाहट गूंज रही थी। शंख-तुरही
जैसे वाद्य भी बज रहे थे। डॉ. अम्बेडकर को देखने के लिए लोगों में इतनी ठेलमपेल
मची थी कि स्वयंसेवकों के लिए भीड़ को काबू में रखना मुश्किल हो रहा था।
* ‘जनता’ 8 और 15 फरवरी, 1936