425
आखिर पांच मिनटों तक डॉक्टर साहब को देखने के बाद सबको शांति मिली और वहां थोड़ी व्यवस्था कायम की जा सकी। उस शांत वातावरण में फिर डॉ. बाबासाहेब ने अपनी गंभीर आवाज में अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा,
”सभापति महोदय और मेरे भाइयों और बहनों,
आज यहां अध्यक्ष द्वारा शर्त रखी गई है कि हर वक्ता को अपना भाषण शुरू करने से पहले अपनी जाति बतानी होगी। (अपने हाथ में बंधी घड़ी का बेल्ट दिखाते हुए) मेरे हाथ के इस काले धागे से आपको मेरी जाति का पता चल ही गया होगा। (लोगों की हंसी की आवाज) आज की सभा में मेरे अलग से भाषण की कोई जरूरत है, ऐसा मुझे नहीं लगता। इस परिषद के आयोजन का निर्णय जब लिया गया तब मैंने सुझाव दिया था कि यहां के युवक इस सभा का अध्यक्ष स्थान स्वीकारें। चूंकि मुझे अब युवाओं में नहीं गिना जा सकता इसलिए मैंने अध्यक्ष स्थान स्वीकार नहीं किया था। लेकिन आज एक कारण पर तो मुझे बोलना ही पडे़गा और वह कारण है, आज की सभा के अध्यक्ष प्रो. शिवराज के प्रति आभार व्यक्त करना। प्रो. शिवराज जी के पीछे कॉलेज के कई काम पूरे करने की जिम्मेदारी होने के बावजूद वे अपनी दिक्कतों को नजरंदाज कर यहां पधारे और अपनी परिषद को उन्होंने समृद्ध किया इसके लिए उनको धन्यवाद देना मेरा कर्तव्य है। जातिभेद की तरह ही इस देश में जबरदस्त प्रांत भेद भी है। अपनी उन्नति के लिए इस देश के सभी प्रांतों के अस्पृश्यों में संगठन होना जरूरी है। लेकिन प्रांतों के बीच जो भाषा भेद हैं, वे अस्पृश्यों की एकता के लिए घातक हैं। उस नजरिए से देखें तो मुंबई इलाके के और महाराष्ट्र के अस्पृश्य समाज ने मद्रदेश के अस्पृश्य नेता को अध्यक्ष पद दिया, यह बडे़ आनंद की बात है। संगठन के नजरिए से भी यह बड़ी अच्छी बात है। (तालियां)। मैं उम्मीद करता हूं कि इसके बाद भी हममें से युवा और अधेड़ सभी इस तरह का संगठन बढ़ा कर, इस देश के अस्पृश्य समाज में प्रेम और सहकारिता की भावना को बल प्रदान करेंगे।
फिलहाल अस्पृश्यों का यानि अपना जो आंदोलन चल रहा है उसे संपेरे का तमाशा या ‘वन मॅन शो’ (one man show) ही कहा जाता है। किसी भी समाज में एक व्यक्ति द्वारा शुरू किया गया आंदोलन सफलता की चोटी तक ही नहीं पहुंच पाता। इसलिए यदि अपना आंदोलन आप सफल बनाना चाहते हैं, तो किसी एक व्यक्ति के हाथ में खेल के सूत्र रहें तो उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिल सकती। इसमें कई सहयोगियों की जरूरत है। खेल खेलते समय अगर एक संपेरा मर गया, तो उसकी जगह उसका ढोल लेकर उसे पीटते हुए खडे़ रहने के लिए दूसरे संपेरे को तैयार रहना जरूरी है। अब तक इस बारे में मैं पूरी तरह आश्वस्त नहीं था, लेकिन