79. धर्म परिवर्तन से सभी अल्पसंख्यकों का कल्याण होगा - जनवरी 1936 पुणे - Page 443

426 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आज की यह सभा देख कर मेरा मन आश्वस्त हो चुका है। (तालियां)। मेरे बाद मेरा कार्य आगे ले जाने के लिए कई कार्यकर्ता पुणे के अस्पृश्य युवकों में से ही आगे आएंगे। इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद दे रहा हूं। (तालियां)

इस अवसर पर मैं और कुछ कहना नहीं चाहता। फिर भी, जिस विषय के बारे में यहां चर्चा हुई, उसके बारे में अगर मैंने कुछ नहीं कहा तो मैं जानता हूं कि आप सब बहुत निराश होंगे। इसलिए मैंने जिस विषय की घोषणा की थी, उस धर्म परिवर्तन के विषय के बारे में भी मैं थोड़ा कुछ बोलता हूं।

धर्म परिवर्तन की बात कहने के बाद से कई लोग मेरे पास आकर इस विषय पर ऊहापोह करते हैं। उनमें प्रमुख रूप से दो तरह के लोग हैं। एक समूह के लोगों का कहना है कि अस्पृश्य लोगों के हित के बारे में जो भी शर्तें ठीक होंगी, मैं उन्हें स्पृश्यों के सामने रखूं और अगर हिंदू उन शर्तों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो फिर धर्म परिवर्तन किया जाए।

दूसरी तरह के लोगों का कहना है कि अस्पृश्यों के धर्मांतरण से कुछ फायदा नहीं होगा। इसलिए वे धर्म परिवर्तन ना करें।

धर्मांतरण से फायदा होगा या नहीं?, अगर फायदा होगा तो उसका क्या अनुपात होगा? आदि बातों के बारे में चर्चा के लिए यह सही जगह नहीं है। और अब हमारे पास इतना समय भी नहीं है। इसलिए ईसामसीह ने यहूदियों को अपने धर्म के बारे में जो बताया था वही मैं यहां कह रहा हूं - “Be unto me, little children and I will save you from sin” ‘बी अनटू मी, लिटिल चिल्ड्रेन एंड आइ विल सेव यू फ्रॉम सिन.’ (छोटे बच्चे अपने मां-बाप पर जिस तरह विश्वास करते हैं, उस तरह आप मुझ पर विश्वास करें और जो मैं कहता हूं उस धर्म का पालन करें, और मैं आपकी पाप से रक्षा करूंगा)। ईसामसीह की तरह ही आज मैं आपसे इतना भर कहना चाहता हूं कि अगर आप मुझ पर भरोसा रखेंगे तो आपका फायदा ही होगा। (भरपूर तालियां) इतना ही कह कर मैं यहां से चला जाऊं ऐसा भी नहीं है। इस बारे में जो भी शक होंगे उन सबका मैं समाधान दूंगा। लेकिन आज उतना समय न होने के कारण ईसामसीह ने उस समय यहूदी लोगों को जो जवाब दिया था, वही मैं आपको देकर अपना भाषण पूरा कर रहा हूं।

जो लोग मुझसे यह कहते हैं कि आप हिंदू धर्म में रहते हुए स्वाभिमान से जीवन जीने के लिए जरूरी अपनी शर्तें स्पृश्य हिंदुओं के सामने रखें और उन शर्तों का स्पृश्य हिंदुओं द्वारा पालन किया जाता है या नहीं यह देखें। उन लोगों से मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं कि मैं जो शर्तें रखूंगा, वे स्पृश्य हिंदू कभी पूरी कर पाएंगे, इस बारे में मुझे यकीन हो चला है। मैं रुपयों की या रोटी की शर्त नहीं रखना