79. धर्म परिवर्तन से सभी अल्पसंख्यकों का कल्याण होगा - जनवरी 1936 पुणे - Page 444

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चाहता। मेरी शर्त इन दोनों से भी भारी है। वह शर्त क्या है यह अगर जानना हो तो, उसे पूरा करने का माद्दा अपने पास है, इस बात पर जिन्हें यकीन हो, वे मुझसे आकर मिलें। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि उस शर्त का पालन करना हिंदुओं से कभी होगा नहीं। (तालियां)

दुनिया के हर समाज का भविष्य उस समाज के पढ़े लिखे लोगों पर निर्भर करता है। आज तक आपने कोई आंदोलन नहीं किया, क्योंकि आपमें कोई पढ़े-लिखा व्यक्ति ही नहीं था। शिक्षा से आदमी को दृष्टि मिलती है। और इस तरह से कहा जा सकता है कि हिंदू समाज में केवल ब्राह्मण ही हैं जिनके पास इस तरह का नजरिया है। वे ही शिक्षित हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। ब्राह्मणों के अलावा मराठा या अन्य हिंदू समाज के पास अपना दृष्टिकोण नहीं है। इस बारे में ब्राह्मणों पर बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन उनकी मानसिकता के बारे में अभी आपको अच्छी तरह से पता नहीं चला है। कोई भी सवाल लीजिए और पूरे समाज के कल्याण की दृष्टि से उसे हल करने का उपाय सामने रखिए। अगर उस उपाय से उनके वर्चस्व को ठेस नहीं पहुंचने वाली हो तो वे झट से उसे स्वीकार करेंगे। लेकिन, अगर आपके सुझाए उपाय के कारण उनके ब्राह्मणत्व को थोड़ा-सा भी नुकसान होने वाला हो तो भले उस उपाय अमल करने से पूरे राष्ट्र का भला होने वाला हो, वे नहीं मानेंगे। ऐसा समाज अपनी शर्तें पूरी करने की जिम्मेदारी लेगा, इस आशा का कोई मतलब नहीं।

बिना कुछ दिए कभी कुछ मिलता नहीं। इस हिसाब से स्पृश्य या ब्राह्मण समाज से कुछ पाने से पूर्व उन्हें कुछ देना भी पड़ेगा। लेकिन क्या आपने सोचा है कि हमें उन्हें क्या देना पडे़गा? यह बात आपकी समझ में आए इसलिए निवापसुŸा में भगवान बुद्ध ने जो कहानी बताई है वह मैं आपको बताता हूं। श्रावस्ती में अनाथपिंडक के आश्रम में रहते हुए भिक्षुओं को उद्देश्य कर बुद्ध ने कहा कि, भिक्खुओं! राजा अपने आरक्षित जंगल में हिरण, जंगली भैंसा, खरगोश आदि पालता है, उनका हर तरह से खयाल रखता है, पालन-पोषण करता है, ममता देता है, लेकिन यह सब वह किसलिए करता है? उन प्राणियों को मार डालने के लिए। शिकार का अपना शौक पूरा करने के लिए, राजा उन दीन-दुखी जीवों का पालन-पोषण करता है। उसी तरह आज अगर स्पृश्य हिंदू या ब्राह्मण आपको ज्यादा रियायतें देकर अपने धर्म में ही रखना चाहते हैं, यह आपके कल्याण के लिए नहीं बल्कि आप हमेशा के लिए उनके गुलाम बन कर रहें, इसके लिए है। (शेम शेम की ध्वनि)

महात्मा गांधी ने 9 लाख रुपयों का फंड इकट्ठा किया। वह आपके हित के लिए नहीं वरन् इसलिए है कि आप काँग्रेस छोड़ कर न जाएं। काँग्रेस का वजन हमेशा