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बीच मांग और भंगी बांधवों की हो रही है। इस बात पर गौर करते हुए अस्पृश्यों के बीच का ऊंच-नीच का भाव एकदम नष्ट करें। मांग और भंगी समाज को मैं आश्वासन देता हूं कि जब महार आपके साथ बराबरी का बर्ताव नहीं करेंगे तब मैं आपके साथ हूं। आपकी ओर से मैं आपकी लड़ाई महारों के साथ लडूंगा। (तालियां)
धर्म परिवर्तन के पीछे जो कई कारण हैं उनमें प्रमुख है हिंदू धर्म में व्याप्त जातिभेद। स्पृश्य हिंदू हमेशा हमें नीचे दिखाते हुए कहते हैं कि पहले अस्पृश्यों के बीच जो भेदभाव हैं, उन्हें नष्ट कीजिए और उसके बाद हमें जातिभेद नष्ट करने की सलाह दीजिए। मैं उनसे सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि जब तक हम आपके धर्म में हैं, तब तक आपसी जातिभेद हम नष्ट नहीं कर सकते। हिंदू धर्म और जाति भेद की फौलादी चौखट में रहते हुए यह सुधार हम कर नहीं पाएंगे, इसीलिए मुझे लगता है कि धर्म परिवर्तन के बाद जातिव्यवस्था में व्याप्त भेदभाव नष्ट करना हमारे लिए आसान होगा, ऐसा मुझे लगता है। अब अगर मैं किसी महार से कहूंगा कि वह मांग की बेटी के साथ अपने बेटे का रिश्ता करे, तो वह तुरंत मुझसे कहेगा कि स्पृश्यों में कहां ऐसा होता है! लेकिन जब हम सभी एक साथ इन बंधनों से बाहर निकलेंगे तो वह ऐसा नहीं कह पाएगा।
धर्म परिवर्तन से महारों से अधिक अल्पसंख्यक मांग, भंगी समाज का ही अधिक कल्याण होगा। वे महारों के स्तर पर आ जाएंगे। इसीलिए मांग या भंगी जाति के ये लोग इस प्रस्ताव का समर्थन करें। जातिभेद नष्ट करना स्वराज पाने की कोशिश से भी पवित्र काम है। पूरे हिंदुस्तान का जातिभेद जब खत्म होना हो तब हो, लेकिन अस्पृश्य समाज का जातिभेद यदि मैं नष्ट कर सकूं तो मैं अपने आपको भाग्यवान पुरुष समझूंगा। (भरपूर तालियां)
आपने आज तक मेरे बारे में जो विश्वास व्यक्त किया उसके बारे में इंसान होने कारण मुझे बड़ी खुशी है। लेकिन साथ ही मेरे सिर पर जिम्मेदारी का बोझ बढ़ रहा है, इसका भी मुझे अहसास है। आप सात करोड़ लोगों की जिम्मेदारी मुझ पर है। मुझसे अगर छोटी-सी भी गलती हो जाए तो इतने बडे़ समाज के नुकसान के लिए मैं जिम्मेदार रहूंगा, इसका मुझे रात-दिन खयाल रहता है। मेरी धर्म परिवर्तन की घोषणा को कुछ लोग पागलपन या भूत भी कहते हैं। लेकिन इसमें मेरा अपना कोई स्वार्थ नहीं है, उल्टे मेरा नुकसान ही है। आज मैं इस हालत में हूं कि अगर चाहूं तो कोई भी लौकिक या साधन संबंधी बात यदि मैं हासिल करना चाहूं तो बड़ी आसानी से पा सकता हूं। यह मेरा अभिमान नहीं बोल रहा, यह मेरे आत्मविश्वास की गूंज है। (तालियां।) एक व्यक्ति के तौर पर देखा जाए तो इस धर्म परिवर्तन के कारण मेरा नुकसान ही होने वाला है। महारों में पढ़े-लिखे बैरिस्टर के तौर पर