80. सभी को दृढ़निश्चय और संगठित होकर आगे बढ़ना है - फरवरी 1936 अहमदनगर - Page 448

l Hk
d k
n`<+f u 'p ;
lax fBr
g ksd j
v kx

80

मंगलवार तारीख 11 फरवरी, 1936 के दिन अहमदनगर में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। डॉ. बाबासाहेब के स्वागत में सभा बुलाई गई थी। इस सभा में 5000 से अधिक लोग उपस्थित थे। शहर के कुछ प्रमुख लोग भी उपस्थित थे। शुरुआत में कुछ स्थानीय अस्पृश्य नेताओं के भाषण हुए। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब के नेतृत्व में अपना पूरा विश्वास व्यक्त कर उनकी धर्म परिवर्तन की घोषणा पर अपनी सहमति प्रकट की।

बाबासाहेब ने अपने भाषण में कहा,

‘‘आज मैं धर्म परिवर्तन के बारे में बात करने के लिए यहां नहीं आया था। क्योंकि, इस सभा में एक ‘अस्पृश्य युवक संगठन’ का उद्घाटन करना ही मेरे यहां आने का उद्देश्य था। लेकिन आज आप लोग यहां इतनी बड़ी संख्या में बड़ी उत्कंठा से इकट्ठा हुए हैं, मैं आप सबको निराश नहीं कर सकता। मैं पहले ही आपको बताता हूं कि धर्म बदलना हंसी-ठिठोली नहीं है। वह कोई तमाशा नहीं है। ढोलक बजाकर केवल गा-बजाकर करने जैसा वह कोई कार्यक्रम नहीं है। धर्मांतरण बहुत ही गंभीर विषय है। आप शायद नहीं जानते, लेकिन चार महीनों पहले जब मैंने सार्वजनिक रूप से धर्म परिवर्तन के बारे में कहा, मुझे इस बारे में लगातार सभी दृष्टिकोणों से सोचना पड़ रहा है। और यह बताने में मुझे गर्व महसूस होता है कि मैंने जो निश्चय व्यक्त किया है, उसके बारे में पछतावा करने की मुझे बिल्कुल जरूरत महसूस नहीं होती है। आपको भी इस सवाल पर पूरी गंभीरता से सोचना चाहिए। हर रोज पांच मिनट तक आप इस बारे में सोचें। अब स्वाभाविक रूप से एक प्रश्न उभर कर आता है कि अगर दृढ़ निश्चय हो ही गया है, तो फिर उस पर अमल करने में देर क्यों? इस बारे में आपको एक छोटा-सा दृष्टांत देना चाहूंगा। उस पर से आप जानेंगे कि इस प्रश्न को कितनी धीमी गति से हल किया जाना जरूरी है? सेनापति को जब डेरा उठा कर आगे बढ़ने का हुकम देना होता है उस समय हट्टे-कट्टे और जवान सैनिकों के बारे में ही सोच कर काम नहीं चलता है। उस वक्त जख्मी, अपाहिज या बीमार सैनिकों की भी उसे देखभाल करनी होती है। उन सबको साथ में ले चलना उसके लिए जरूरी होता है। निर्णय पक्का कर आगे बढ़ने का समय आएगा तब हममें से अज्ञानी, अशिक्षित या डरपोक लोग पीछे रहेंगे तो काम नहीं चलेगा। इसीलिए, सबको एक ही समय पर दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना है।

* ‘जनता’ 22 फरवरी, 1936