432 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अब आज के प्रमुख कार्य के बारे में बोलना हो तो, यहां युवाओं ने जो सेवा धर्म का उद्देश्य सामने रख कर इस संस्था की स्थापना की है तो मैं इसके लिए आपका अभिनंदन करना चाहूंगा। आपने जो कार्य शुरू किया है वह अनुकरणीय है। आपमें कई ऐसे लोग हैं, जो आपकी मदद के बगैर आगे नहीं बढ़ सकते। इस काम में आप एक बात कभी ना भूलें कि ष्चरित्र और शिक्षा के बिना इंसान इस दुनिया में कुछ भी हासिल नहीं कर सकता।ष् दूसरी बात ध्यान में रखें कि आज आप स्वतंत्रता और स्वावलंबित्व पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस युद्ध में अगर आप सफल होना चाहते हैं तो आप किसी और से मदद की अपेक्षा छोड़ कर पूरी तरह आपको स्वावलंबी होना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते तो ध्यान रखें कि आप फिर अज्ञान की खाई में जा गिरेंगे। जिन स्पृश्य हिंदुओं ने आज तक आप लोगों को दासता में जकड़ कर रखा वे आपको लालच देकर आपकी मदद के लिए तुरंत आकर खड़े हो सकते हैं! लेकिन अगर आप इस मोहजाल में फंसेंगे, तो उनके पैर के घुंगरु बन कर रह जाएंगे। आप फिर से गुलाम बन जाएंगे। महाभारत की कथाएं आपने सुनी ही होंगी। उसमें से एक कथा इस प्रसंग के लिए बहुत ही योग्य है। मैंने वह कथा सैंकड़ों बार पढ़ी है। आपने भी हो सकता है पढ़ी हो। हो सकता है अबके बाद कभी वह आपको पढ़ने मिलेगी। आप जानते हैं कि कौरव-पांडवों के युद्ध में भीष्म और द्रोण कौरवों की तरफ से लडे़। न्याय और सत्य पांडवों की तरफ है इसका उन्हें पूरा ज्ञान था फिर भी वे कौरवों का पक्ष छोड़ नहीं पाए क्योंकि उन्होंने उनका नमक खाया था। इसीलिए मैं कहता हूं कि किसी के सामने लज्जित होना पडे़ ऐसा कुछ मत करो।
आखिर में एक बात और कहना चाहूंगा। अलग-अलग कई संस्थाएं शुरू न करें। अगर आप मेरा अनुभव पूछे तो वह यही बताता है कि अलग-अलग संस्थाएं एक दूसरे के बीच फूट डालने के लिए ही कारण बनती हैं। और आखिर सब की सब नष्ट हो जाती हैं। पूरे जिले की केवल एक संस्था रहे और उसी संस्था के जरिए अपने लिए सही मार्ग का चुनाव कर अपना सुधार सिद्ध करें।