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आप गुलामों की तरह जीना चाहते हैं या आजाद इंसानों की तरह
जीना चाहते हैं?
कुलाबा जिला उŸार विभाग और ठाणे जिला दक्षिण विभाग के अस्पृश्यों की संयुक्त परिषद की तैयारी के लिए श्री गणपत महादेव जाधव उर्फ मडके बुवा पिछले 15-20 दिनों से जिस इलाके में परिषद होनी थी, वहां प्रचार के लिए गांव-गांव में घूम रहे थे। परिषद के स्वागताध्यक्ष श्री रामकृष्ण गंगाराम भातनकर (कुलाबा जिला लोकल बोर्ड के सदस्य) ने तैयारी बड़ी बारीकी के साथ और बडे़ उत्साह से की। इसका फल भी उन्हें मिला। पनवेल में परिषद का अधिवेशन 29 फरवरी और 01 मार्च, 1936 इन दो दिनों में बहुत अच्छी तरह संपन्न हुआ।
संपूर्ण हिंदुस्तान के अस्पृश्य वर्ग के एकमात्र नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने परिषद का अध्यक्ष पद स्वीकारा था, इसलिए अधिवेशन बहुत ही महत्त्वपूर्ण हो गया था। डॉ. बाबासाहेब शनिवार, दिनांक 28 फरवरी 1936 के दिन मुंबई से अपने सहयोगियों के साथ स्पेशल मोटर से करीब 4.30 बजे निकले। उनके साथ मे. सुभेदार विश्राम गंगाराम सवादकर, वयोवृद्ध श्री संभाजी तुकाराम गायकवाड़, सी. ना. शिवतरकर, वनमाली मास्टर, प्रि. मो. वा. दोंदे, बी. ए. कमलाकांत चित्रे, आर. डी. कवली, बी. ए., एल. एल. बी. वकील, रेवजी बुवा डोलस, दिवाकर पगारे, धुंडिराम गायकवाड़, मडकेबुवा जाधव आदि लोग थे।
पनवेल के करीब के तलोजे के लोगों ने खास मंडप खड़ा कर डॉ. बाबासाहेब का स्वागत करने का इंतजाम किया हुआ था। स्वागताध्यक्ष श्री रामकृष्णराव भातनकर ने उनका स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने बाबासाहेब को फूलमालाएं अर्पण कीं, गुलदस्ते दिए। फिर मोटर आगे चली। पनवेल गांव में पहुंचते ही मुसलमान व्यायामशाला और अंजुमन इस्लाम संस्था की ओर से फूलमाला अर्पण की गईं। उसके बाद सिद्दिकबुड्ढा सेठ नाम के मुसलमान आदमी ने बाबासाहेब को फूलमाला अर्पण की। उनके बाद चांभार समाज के श्री महादेव लक्ष्मण और महादेव मारुती आदि लोगों ने उनका सम्मान किया। इस तरह प्रेम से दिए पुष्पहारों का स्वीकार करते-करते शाम सात बजे के आसपास डॉ. बाबासाहेब पनवेल के करीब के सुभेदार वाडा में दाखिल हुए। यहां उनकी सुविधा के लिए एक खास मंडप खड़ा किया गया था। इस मंडप में डॉ. बाबासाहेब का आगमन होते ही महिलाओं ने वात्सल्यभाव से उनका स्वागत
* ‘जनता’ 7 मार्च, 1936
यह शुक्रवार, का दिन होना चाहिए : संपादक