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के लिए अधिक शिक्षा की जरूरत नहीं होती। दूसरी-तीसरी कक्षा तक पढे़ स्पृश्य समाज के किसी भी आदमी को यह नौकरी मिल सकती है। लेकिन आपको वह जगह मिलती नहीं। ऐसा नहीं कि आपमें ईमानदारी या सच्चाई की कमी है, क्योंकि आज की तारीख में महारों से लाखों रुपयों का वसूल वसूला जाता है। इस वसूल के लाने-ले जाने का काम महार ही करते आए हैं। वसूल के इस लाने-ले जाने में महारों से कोई घपला हुआ है, महारों ने दगलबाजी की हो ऐसा आज तक किसी के सुनने में नहीं आया है। तहसीलदार जैसे उच्च पद की नौकरियां करने वाले स्पृश्य समाज के लोगों से कई दगाबाजियां हुई हैं। उसके उदाहरण दिए जा सकते हैं। यह नौकरियों के बारे में हुआ। अन्य छोटे-मोटे व्यवसाय लीजिए। अगर आप दूध, दही, मक्खन बेचने का धंदा करने की सोचेंगे तो कोई आपसे ये चीजें ख्ररीदेगा नहीं, क्योंकि आपके छुए दूध, दही, मक्खन से लोगों का धर्म डूब जाएगा। सब्जी बेचने के बारे में सोचिए, वही बात दोहराई जाएगी। आप कहीं सिर उठा ही नहीं सकेंगे। आपकी हालत आज ऐसी है। मैं आप लोगों से पूछता हूं कि क्या आपने कभी अपनी इस हालत के बारे में सोचा भी है? बाकी लोग अपने बच्चों की अच्छी तरह देखभाल करते हैं, उनकी पढ़ाई का प्रबंध करते हैं। इससे वे अपनी हालत सुधार सकते हैं। आप क्यों ऐसा कर नहीं सकते? हर तरफ से आपकी राहें रोकी गई हैं। आज आपको इन सवालों पर सोचना होगा। आपके रास्ते में जो रुकावटें हैं उनसे छुटकारा कैसे पाया जाए, यह आपको सोचना चाहिए। मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूं, क्या आप अपनी स्थिति में सुधार लाना चाहते हैं या नहीं? आज तक आपको जिस कीचड़ में लोट लगाना पड़ा है, क्या आप हमेशा उसी कीचड़ में लोट लगाते रहेंगे? जहां पैर के जूते जितनी भी आपकी हैसियत नहीं, क्या यहीं आप अपने आपको गलाते हुए रहना चाहते हैं? सीधे ही पूछना हो तो, क्या आप गुलामों की तरह जीना चाहते हैं, या आजाद इंसानों की तरह जीना चाहते हैं? इस बारे में आज आपको सोचना होगा। आपकी राह रोक कर जो समस्याएं खड़ी हैं, उन्हें दूर कैसे किया जा सकता है इस बारे में आपको सोचना है।
आज आपके सामने मुख्य रूप से तीन बाधाएं हैं - पहली है आपकी दरिद्रता, दूसरी आपका मनोदौर्बल्य, आपका कमजोर मन। आप सब दरिद्रता से परेशान हैं। और इसीलिए परावलंबी बने हैं। दूसरों पर आश्रित बने हैं। आप आजादी से, अपने बलबूते कुछ कर नहीं पाते। इंसानियत को लेकर आपने सवाल किए तब भी आपका स्पृश्य समाज से घनघ्ोर विरोध होता है। आपका जीवन उसी पर निर्भर होने के कारण वे हर तरह से आपकी राह में अडंगे डालते हैं। वे रोटी का टुकड़ा देंगे, तब आपकी भूख मिटेगी। इसीलिए, इस परावलंबी जीवन को नष्ट करने के पीछे आपको लग जाना चाहिए।