438 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दूसरी बात है आपकी असहाय स्थिति। आपको किसी का सहारा नहीं। आपका हितचिंतक मित्र बन कर आपके पीछे खडे़ रहने के लिए कोई तैयार नहीं। आप और गांव वालों के बीच अगर झगड़ा पैदा हुआ तो आपकी तरफ से लड़ने के लिए कोई नहीं आएगा। इस देश में हिंदुओ के अलावा सिक्ख, ईसाई और मुसलमान धर्म भी हैं। लेकिन मुसलमान या ईसाई लोग आपकी मदद के लिए आगे नहीं आते। वे क्यों नहीं आते इस बारे में आप सोचिए। जिस धर्म में हम पैदा हुए, जिस धर्म के सिद्धांतों का हम पालन करते हैं, जिस धर्म को हम अपना मानते हैं वही धर्म आज आपको पीड़ा पहुंचा रहा है। इसी तरह असहाय रह कर उससे मिल रही पीड़ा, आप कितने समय तक और सहोगे? आपसे मैं पूछता हूं कि किसी की मदद लिए बगैर क्या आप हिंदुओं के खिलाफ चल रहे अपने युद्ध में जीत सकते हैं? जिनके सहारे आप जीते हैं, वे क्या कभी आपको इंसानियत के अधिकार देंगे? मैं आपको एक बात पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि हिंदुओं से कभी भी आपका भला नहीं होगा। अपने बच्चे को धक्का देकर कुएं में ढकेलने वाला बाप उसका मित्र होगा या उसका हाथ पकड़
खींच कर उसे बाहर निकालने वाला आदमी उसका मित्र होगा? इस तरह हाथ आगे बढ़ा कर मदद करने वाला मित्र आपको ढूंढ निकालना है।
आज हिंदू लोग मुसलमानों से बचकर क्यों रहते हैं? हिंदू लोग उनके धर्म से नफरत करते हैं, उन्हें बुरा-भला कहते हैं। लेकिन गांव के दो की संख्या में मुसलमानों के घर के होने पर भी उनके बच्चों तक को छेड़ने की हिंदुओं की हिम्मत नहीं है। इसका कारण क्या है? मुसलमान के बच्चे को भी अगर किसी ने छेड़ा तब पूरे हिंदुस्तान का पूरा मुसलमान समाज उस बच्चे की मदद के लिए दौड़ता हुआ आएगा और हिंदुओं पर हमला बोलेगा। हिंदू आपको परेशान करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आपकी मदद के लिए कोई दौड़ा चला नहीं आएगा।
कई लोग आपको बताते हैं कि आप अपने पैरों पर खडे़ हो जाइए, लेकिन जिसके दोनों पैर काटे गए हों वह कैसे खड़ा रहे? आपको किसी का हाथ पकड़ कर ही
खडे़ रहना होगा। तभी आपकी ताकत बढ़ेगी। आपकी आज की असहाय स्थिति में जो आपकी मदद करेगा, वही आपका सच्चा मित्र होगा। मित्र भी और संरक्षक भी। इसीलिए मैं कहता हूं कि आपको अपना धर्म बदलना चाहिए। इंसान को धर्म प्रिय नहीं, उसे इंसानियत प्रिय होती है।
कातकरी की तरह बेहद पिछड़ी जाति के साथ भी हिंदू धर्म में इंसानियत के साथ पेश आया जाता है। वे स्पृश्यों के घरों में जा सकते हैं, लेकिन आप उनके दरवाजे में भी खडे़ नहीं रह सकते। आपके हाथ का छुआ दूध भी कोई नहीं लेगा। नौकरी कर या कोई अन्य काम-धंधा कर अपनी उन्नति करवा लेने के जो भी मार्ग