81. आप गुलामों की तरह जीना चाहते हैं या आजाद इंसानों की तरह जीना चाहते हैं? - मार्च 1936 पनवेल - Page 456

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हैं, वे सब आपके लिए बंद हैं। ईसाई या मुसलमान धर्म के लोग जो नौकरियां करते हैं, वे अगर आप करना चाहेंगे, तो उसके लिए हिंदू आपका विरोध करेंगे। इसीलिए मैं आपसे फिर से कहता हूं कि इस हिंदू धर्म में रहते हुए आप अपनी उन्नति हासिल नहीं कर सकते। आप हिंदू हैं, इसीलिए आपकी यह हालत है। आप अगर मुसलमान होते या ईसाई होते या सिख होते तो ये सब रास्ते आपके लिए खुले होते। आप कुछ हद तक अपने लिए आर्थिक विकास बटोर सकते थे, लेकिन आप जब तक हिंदू हो, तब तक यह शैतानी जकड़ और उनका शिकंजा, कभी आपसे दूर नहीं होगा। इसी वजह से आप जिंदा नरक में पिस रहे हैं। इसीलिए, आप अपने हालात के बारे में अच्छी तरह से सोचिए। इस आत्मघातक धर्म को आप कब तक सीने से लगाए बैठे रहेंगे? इसीलिए, इन स्थितियों के बारे में आप अच्छी तरह से सोच लीजिए। मृत्यु के बाद आपको स्वर्ग सुख चाहिए या जिंदा रहते हुए आप स्वर्ग सुख भोगना चाहते हैं? मैं तो इसी जन्म में अपने लिए मोक्ष यानी इंसानियत चाहता हूं। दूसरे जन्म या काल्पनिक स्वर्ग से मुझे कुछ लेना-देना नहीं है।

तीसरी बात यह है कि हिंदू धर्म की मूर्खताभरी सीख से आपके मन मरे हुए हैं। जिस तरह सांप देखते ही आदमी डर जाता है, उसकी नसें अकड़ जाती हैं कुछ उसी तरह की आपकी आज की हालत है। आपको लगता है कि हम एकदम निचली जाति के हैं, हलकी जाति के हैं। हिंदू धर्म आपको अतिशूद्र मानता है। और आप अपने आपको अतिशूद्र मानते हैं। इसीलिए राह चलते भी हिंदुओं के पास से आप नहीं गुजरते, वे सामने पड़ते हैं, तो आप परे हो जाते हैं। इसका मतलब यही है कि आपका मन मरा हुआ है। आपका स्वाभिमान सोया हुआ है। आपको नहीं लगता कि आप इंसान हैं। इसीलिए अपने पर जुल्म करने वाले हिंदुओं के साथ संघर्ष करने की आप सोचते भी नहीं। एक बात की मैं आपको चेतावनी देता हूं, कि जब तक आप हिंदू धर्म की चौखट में हैं, जब तक आपके हाथों और पैरों में ये बेडि़यां जकड़ी हुई हैं, जब तक आपके मन पर इस धर्म की सीख की जकड़ है, तब तक आप इसी तरह बिना काम के, बिन पेंदे के रहेंगे।

आप सब लोग खेतीहर हैं। किसान हैं। आपको पता है कि पौधा कब पनपता है। आपको पता है कि एक पेड़ की छाया में दूसरा पेड़ जिंदा नहीं रह सकता। और अगर जी भी गया तो बौना हो जाता है। आम के पेड बौने हों तो दो पेड़ों के बीच कम से कम 15-20 फूट की दूरी रखनी पड़ती है। तभी उन पेड़ों में मौर आता है और अच्छे, मीठे फल उगते हैं। इसके पीछे क्या कारण है? बड़े पेड़ के नीचे छोटे पेड़ को जरूरी प्रकाश नहीं मिलता। उस पर सूरज की रोशनी नहीं आती। उसे अन्य पोषक द्रव्य भी जितनी मात्रा में मिलने चाहिए, उतनी मात्रा में नहीं मिलते। आपकी हालत उस छोटे पौधे जैसी हुई है। हिंदुओं की छाया में रहने की वजह से