81. आप गुलामों की तरह जीना चाहते हैं या आजाद इंसानों की तरह जीना चाहते हैं? - मार्च 1936 पनवेल - Page 457

440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आपका विकास नहीं हो पाया। बौने पेड़ की तरह तुम्हारी हालत हुई है। सज्जनों! इतने दिनों तक आप सोए हुए थे। अन्य लोगों ने इस दौरान दुनिया में क्या लूट मचा रखी है, इसके बारे में अब हमें सोचना होगा।

मेरी बताई तीन दिक्कतों को दूर करने के बारे में अगर आप जी जान लगा कर जुट जाएंगे तो आपका विकास जरूर होगा। अब हम आपकी समस्याओं के बारे में सोचेंगे। आपकी पहली समस्या है आपकी दरिद्रता। इसे दूर करना आपके हाथ में नहीं है। लेकिन हमें मिल कर उसे दूर करने की कोशिश करनी होगी। इस बारे में आपसे अधिक जिम्मेदारी मुझ पर है। मैं और मेरे सहयोगियों पर यह जिम्मेदारी है। अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए हमें अपने राजनीतिक अधिकार पाने की कोशिश करनी होगी। आज विधिमंडल में आपको 15 जगहें मिली हैं। उन जगहों पर जाने वाले प्रतिनिधियों पर आपकी हर प्रकार से मदद करने की जिम्मेदारी होगी। अपने हालात की सही जानकारी देकर अपने प्रतिनिधियों से उनका कर्तव्य करवा लेना आपकी जिम्मेदारी है।

दूसरी और तीसरी समस्या हैं आपकी ‘असहायता’ और आपके ‘मन का कमजोर होना’। इन्हें दूर करना पूरी तरह आपके हाथ में है। उसे कैसे दूर किया जा सकता है, यह मैं अपने कर्त्तव्य के तौर पर आपको बताऊंगा। उस पर अमल करना या नहीं करना, यह पूरी तरह आपके हाथ में है। मेरे मतानुसार ये दोनों समस्या आपके हिंदू धर्म छोड़ने से दूर होने वाली हैं। मैंने आपको बताया है कि असहायता दूर करने के लिए आप दूसरे धर्म के समाज को अपना मित्र बना लें। उसी तरह आपके मन की दुर्बलता को नष्ट करने के लिए आपके सामने दूसरे धर्म की मदद लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। थो़डे शब्दों में बताना हो तो इन दोनों समस्याओं पर जीत हासिल करनी हो तो एक ही उपाय से की जा सकती है - धर्मांतरण। धर्म परिवर्तन करने के लिए अब आपको तैयार हो जाना पडे़गा। धर्म परिवर्तन कब करना है, कौन से धर्म में जाना है यह मैं सही समय आने पर बता दूंगा। अगर मेरा कहना आपको सही लगता है, तो मेरे पीछे आइए। अगर सही नहीं लगता तो इसी धर्म में पिसते रहिए। मैं भी आपकी ही जाति में पैदा हुआ हूं। इसीलिए अपना कर्त्तव्य मान कर, मैं यह आपको बता रहा हूं। अपने भले-बुरे की जिम्मेदारी अगर आप मुझे सौंप रहे हैं, तो मेरे बताए अनुसार व्यवहार के लिए आपको तैयार रहना होगा। मैं जिधर जाऊंगा उस तरफ आपको मेरे पीछे-पीछे आना होगा।

आखिर में मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि हालात बहुत ही मुश्किल हैं, आपातकाल है। हमें इस बात का निर्णय करना होगा कि ऐसे हालात में हमें क्या