82. आंदोलन का फायदा सभी अस्पृश्यों को हुआ - मार्च 1936 पनवेल - Page 459

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आंदोलन का फायदा सभी अस्पृश्यों को हुआ

शनिवार दिनांक 29 फरवरी, 1936 को रात साढे़ नौ बजे श्री राघोबा वनमाली की अध्यक्षता में पनवेल तालुका के चमार जाति की एक सभा हुई। उस सभा में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए -

प्रस्ताव 1 : बादशाह पंचम जॉर्ज की मृत्यु के बारे में दुःख व्यक्त करना और नए

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बादशाह आठवें एडवर्ड का अभिनंदन करना।

प्रस्ताव 2 : डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास प्रकट करना।

प्रस्ताव 3 : नासिक जिले के येवले गांव में हुई सभा में रखे गए धर्म परिवर्तन

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के प्रस्ताव को समर्थन देना।

इस सभा में श्री शिवतरकर, गवरूजी उरणकर, महादेव कल्याणकर, मारुती मोहोकर, महादेव महाडिक आदि वक्ताओं के भाषण हुए। आखिर में अध्यक्ष राघोबा वनमाली जी ने डॉ. अम्बेडकर और उनके धर्मांतरण की नीति के बारे में प्रभावी भाषण किया और सभा बर्खास्त हुई।

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पान-सुपारी समारोह

रविवार दिनांक 1 मार्च, 1936 के दिन अस्पृश्य परिषद का काम पूरा होने के बाद पनवेल के चमार लोगों ने डॉ. अम्बेडकर को पान सुपारी का आमंत्रण दिया। उनके पास समय की कमी होने के बावजूद उन्होंने वह आमंत्रण सहर्ष स्वीकार किया। इस अवसर पर श्री. वनमाली जी ने ग्रामीणों के आग्रह पर एक छोटा-सा भाषण दिया। उसमें उन्होंने कहा,

‘‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने यहां के चमार लोगों के आमंत्रण को स्वीकार कर अपने दर्शनों का लाभ उन्हें दिया, इसके लिए वे आपके बहुत बहुत आभारी हैं । यहां के चमार और महारों के बीच कोई मतभेद नहीं है। यहां के चमारों ने उनके आगमन पर फूलों की माला पहना कर उनका स्वागत किया। साथ ही वहां जब जुलूस निकला, उस समय उनके फोटो को हार पहना कर उन पर का अपना स्नेह व्यक्त किया। परिषद के खुले सम्मेलन में महिला और पुरुषों ने खुले दिल से हिस्सा लिया और धर्म परिवर्तन के प्रस्ताव को भी अपना समर्थन दिया। साथ ही कल रात

* ‘जनता’ 7 मार्च, 1936