83. वोट बेचना अपराध तो है ही साथ ही वह आत्मघात भी है - मार्च 1936 वेढ़ी पालघर (ठाणे) - Page 462

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तांगे वाले के आगे आने से उसकी देखा-देखी भंडारी जाति के 3 और तांगे वाले भी आगे आए। उन्होंने भी बताया कि वे हड़ताल से हट कर सवारियां ढोने और किराया लेने के लिए तैयार हैं। इस तरह कुल चार तांगों में डॉ. बाबासाहेब और कुछ और लोग वेढ़ी की तरफ रवाना हुए। अस्पृश्य होने के नाते आज तांगे वाले अपने साथ इस तरह पेश आए, यह देख कर उन्हें हिंदू समाज में अपनी हालत के बारे में सोच कर बहुत बुरा लगा।

आखिर 12 बजे सभी लोग वेढ़ी के सम्मेलन स्थल तक पहुंचे। वहां सम्मेलन के लिए बड़ा मंडप खड़ा किया गया था। मंडप के ऊपर ताल वृक्ष के पŸां की छत बनाई थी। सभी ओर से मंडप को सजाया गया था। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के सम्मेलन स्थल पर पहुंचते ही उनके नाम की जयध्वनि की गई। सम्मेलन के लिए ठाणे जिले के वसई के श्री. विष्णुपंत दांडेकर वकील, बोर्डी के श्री. मुकुंदराव आनंदराव सावे, वेढ़ी के नथोबा त्रिंबकराव म्हात्रे, विरार के एच. जी. वर्तक, श्री. खंडूभाई शहा, देवमास्तर और वेढ़ी गांव के अन्य स्पृश्य लोग उपस्थित थे। उपस्थित अस्पृश्य समुदाय की संख्या करीब 3-4 हजार तक थी।

परिषद की शुरुआत में ईशस्तवन हुआ। उसके बाद परिषद के स्वागताध्यक्ष श्री शिवराम गोपाल जाधव ने अपने भाषण में सबका स्वागत किया। उनके बाद परिषद के नियोजित अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। उन्होंने कहा,

”स्वागताध्यक्ष, और मेरे प्रिय भाइयों और बहनों,

आज की इस सभा को एक अपूर्वता प्राप्त हुई है, यह कहना गलत नहीं होगा। मेरे सार्वजनिक कार्यों में हिस्सा लेने की शुरुआत से लेकर अब तक इस विभाग में कभी कोई कार्यक्रम नहीं हो पाया था। 16 साल पहले यहां के टेंभुर्णी गांव में परिषद हुई थी। उसके बाद आज परिषद हो रही है। इस जिले के लोग इतनी बड़ी संख्या में आज यहां एकत्रित हो रहे हैं यह बहुत अच्छी बात है।

सम्मेलन आयोजित करने के लिए इस जिले के नेता श्री. शिवराम गोपाल जाधव ने बहुत परिश्रम किए। इसलिए मैं पहले उनका अभिनंदन करता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।

सज्जनों, बहुत लंबा भाषण कर मैं आपका समय जाया नहीं करूंगा। लेकिन दो बातों के बारे में मैं आपको बताना चाहता हूं। पहला मुद्दा है धर्मांतरण का। कुछ लोग कहते हैं कि धर्म परिवर्तन करने से क्या होगा? इसका जवाब कई तरह से दिया जा सकता है। लेकिन मैं एकदम सीधे शब्दों में उसका जवाब देता हूं। धर्मांतरण के सवाल का स्वरूप बहुत ही गहन और दार्शनिक है। इसके बारे में सब लोगों की