446 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समझ में आए इस तरह से बातचीत की जाना जरूरी है।
आज आप की स्थिति अपाहिजों जैसी है। आप अनपढ़ और दरिद्र हैं। आपमें किसी तरह की ताकत नहीं है। मैं जो कह रहा हूं उसके लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं है। जिस गांव में आप रहते हैं वहां आपकी बस्ती और अन्य लोगों की बस्ती में आप तुलना करेंगे, तो जान जाएंगे कि आपकी हालत कितनी बदतर है। प्रकृति से मिलने वाली सामग्री पर ही जानवर और पंछी खुश रहते हैं। इस दुनिया में प्रकृति निर्मित चीजों पर ही उनका जीवन निर्भर करता है। लेकिन आदमी चाहता है कि प्रकृति ने जो और जितना दिया है, उससे थोड़ा अधिक उसे मिले। अपनी उन्नति की इच्छा सभी मानवी समाज की होती है। आप अपनी दरिद्र स्थिति को बदलकर आगे जाना चाहते हैं। क्या आप अपने पैरों पर खडे़ हो सकते हैं? इस बारे में सोचिए। मैंने आपकी स्थिति के बारे में जितना सोचा है, उससे मुझे यकीन हुआ है कि आपको किसी की मदद लेनी चाहिए। आज आप लोगों के बीच शिक्षित लोगों की कमी है। आपको शिक्षा, खासकर उच्च शिक्षा लेनी चाहिए। एक जमाना था, जब चार किताबें पढ़ा स्पृश्य व्यक्ति भी तहसीलदार बनता था। लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। आज उच्च शिक्षा के बगैर किसी को भी सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है। आप लोगों के तो खाने के लाले पड़े हुए हैं, आप अपने बच्चों को क्या बी. ए., एम. ए. कराएंगे? आपमें ऐसा कोई भी आदमी नहीं है, जो अपने बलबूते अपने बच्चों को पढ़ा सके। ऐसी स्थिति में अगर कोई समाज आपसे किसी तरह की कोई उम्मीद रखे बगैर और आपके स्वाभिमान को किसी तरह चोट पहुंचाए बगैर आपकी सहायता करने के लिए तैयार हो तो आपको उसकी मदद लेकर स्पृश्य हिंदुओं के साथ की स्पर्द्धा में अग्रसर होते रहना चाहिए।
आज अपने कई लोग मेहनत कर अपना पेट पालते हैं। उन्होंने अगर कड़ी मेहनत की, रोजगार किया तो ही किसी तरह उन्हें पेट भरने के लिए भोजन और बदन ढंकने के लिए कपडे़ मिल सकते हैं। आज आपको जो रोजगार मिलता है, वह स्पृश्य हिंदुओं की मिन्नतें करने के बाद ही मिलता है। आपका कोई अपना धंधा नहीं है। न आप अपने खेतों में खेती करते हैं। आपका अपना कोई व्यापार नहीं है, व्यापार करने जैसे कोई साधन भी नहीं हैं, अलग से साधन पैदा करने की आपकी माली हालत नहीं और यदि होती भी तब भी आपको मौका नहीं मिलता। सरकार ने कानून बना कर पानी के सभी सार्वजनिक स्त्रोतों पर पानी भरने का अधिकार आपको दिया है। लेकिन आपका अनुभव आपको बताता है कि स्पृश्य लोग इन जगहों पर आपको पानी भरने नहीं देते। आपने यदि इन जगहों पर पानी भरा तो स्पृश्य लोग आपको बहिष्कृत करते हैं। उस समय आप पर बहुत बुरी बीतती है। उस शोषण, यंत्रणा, यातना, तकलीफों और संकटों से गुजरते समय उसी गांव के